Home राज्य अब महाराष्ट्र में लिंगायत समुदाय ने की धार्मिक अल्पसंख्यक दर्जे की मांग

अब महाराष्ट्र में लिंगायत समुदाय ने की धार्मिक अल्पसंख्यक दर्जे की मांग

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औरंगाबाद

कर्नाटक सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग पर सहमति के बाद अब महाराष्ट्र में भी लिंगायत समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यक दर्जे की मांग की है। हाल ही में कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने लंबे अरसे से चली आ रही इस मांग को मंजूर करते हुए केंद्र को अपनी सिफारिश भेजी है।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में ऑल इंडिया लिंगायत को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने अपनी मांग के साथ जुलूस निकाला। ऑल इंडिया लिंगायत को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने औरंगाबाद में महामोर्चा निकालते हुए अपनी मांग रखी। लिंगायत समुदाय के लोगों ने डिविजनल कमिश्नर के ऑफिस तक मार्च निकाला। यह कमिटी महाराष्ट्र में लिंगायत समुदाय के लिए संवैधानिक मान्यता के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक दर्जा देने की मांग कर रही है।

बता दें, इससे पहले कर्नाटक में भी लिंगायत समुदाय स्वतंत्र धार्मिक पहचान की मांग करता रहा था। हाल ही में सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने पर अपनी मुहर लगाई है। अब यह मामला केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले राज्य की कांग्रेस सरकार के इस कदम को मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।

कर्नाटक में लिंगायत समुदाय काफी प्रभावशाली है। 17 फीसदी से ज्यादा आबादी वाले लिंगायत समुदाय का राज्य की 224 में से तकरीबन 100 विधानसभा सीटों पर वर्चस्व है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हाल ही में लिंगायतों के मठ का दौरा किया था। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी लिंगायत संतों से मुलाकात कर चुके हैं। बीजेपी ने लिंगायत समुदाय से आने वाले बीएस येदियुरप्पा को अपना सीएम कैंडिडेट घोषित किया है। 2008 में जब पहली बार कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बनी थी, तो येदियुरप्पा ही मुख्यमंत्री बने थे।

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