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अब शुरू होगी प्रमोशन की जंग

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भोपाल

यूं तो लंबे समय से एजीएम बने एमके धर, एके चतुर्वेदी, जीके श्रीनिवासा,एमके श्रीवास्तव, अमिताभ दुबे, अजय सक्सेना, असीम धमीजा, एमएल तौरानी, नीरज दवे, एस चन्द्रशेखर, अनंत टोप्पो, पी पंड्या जैसे कई अफसर प्रमोशन की कतार में हैं, लेकिन इस बार महाप्रबंधक बनेंगे वही जिनमेें दम है। भेल कार्पोरेट ने अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक पद के दावेदारों के प्रमोशन की तारीख 12-13 जून मुकर्रर कर दी है। ऐसे में प्रमोशन पाने वालों का सियासी पारा गर्म हो गया है वह हर हाल में प्रमोशन पाने अपने आंकाओं के दरवाजे खटखटाने लगे हैं।

खबर है कि इस बार साल 2012 और 2013 के अफसर ज्यादा बाजी मार सकते है। इनमें एम इसादोर, प्रवीण वाष्र्णेंय, एस रहमान, ब्रजेश अग्रवाल, रामभाऊ पाटिल, रूपेश तेलंग, विपुल अग्रवाल, संजय चन्द्रा, अमित शर्मा, राजीव शर्मा, रामेश्वर चौधरी के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हेै। इनमें से इंजीनियरिंग व शॉप से जुड़े एजीएम को मौका मिल सकता है। थर्मल ग्रुप कामर्शियल में एजीएम रूपेश तेलंग के आने से खलबली मची है। जबकि शॉप के एजीएम रामभाऊ पाटिल सबसे पहले प्रमोशन की कतार में खड़े है। श्री तेलंग भले ही कामर्शियल में हो लेकिन उन्हें विभाग के मुखिया का आर्शीवाद प्राप्त है। इस बार एम इसादोर का भी जीएम बनना लगभग तय माना जा रहा है। यदि हैदराबाद के ईडी बाला साहब 31 मई को डायरेक्टर बन गये तो 2011 के एजीएम एस चन्द्रशेखर का भी नंबर लग सकता है।

और ले लिया फायनेंस का चार्ज

पहले फायनेंस में काम कर चुके फेब्रीकेशन के महाप्रबंधक को एक बार फिर एक माह के लिए इसी विभाग का चार्ज मिल गया है। दरअसल इस विभाग की महिला महाप्रबंधक एक माह के लिए विदेश चली गई हंै। चर्चा है कि पहले तो जीएम साहब ने इस विभाग का चार्ज लेने में इसलिए आनाकानी इसलिए की भेल कार्पोरेट के एक जूनियर लेवल के अफसर ने यह आर्डर निकाला था जो उन्हें नागवार गुजरा। शायद उन्हें यह मालुम नहीं था कि यह आर्डर बिना चेयरमेन या डायरेक्टर एचआर के अप्रूवल के नहीं निकलता। खैर बड़े मान मनौब्बल से उन्होंने यह चार्ज लिया। चर्चा यह है कि 2013 में साहब जीएम तो बन गये लेकिन उनके साथ के कुछ अफसर या तो जीएमआई बन गये या फिर ईडी ऐसे में उनकी यह नाराजगी भी जायज है। इससे उन्हें काफी ठेस पहुंची फिर भी मन मारकर काम कर रहे हैं। अब इस बार जीएमआई बनते हैं या नहीं या फिर रिटायरमेंट के पूर्व अगले साल ही प्रमोशन मिलेगा इसका फैसला तो कार्पोरेट ही करेगा। इधर कारखाने में स्वीचगियर विभाग की तारीफ की खबरें थमने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल इस विभाग में कॉपर और चांदी चोरी की घटनाएं आम हो गई है। चर्चा है कि पिछले सप्ताह ही 20 किलो कॉपर तो चोरी हुआ ही है उस पर पिछली चोरी की वारदातों का पर्दा फाश करने में भेल और सीआईएसएफ की विजिलेंस नाकाम रही है। ऐसे में इस विभाग पर सवालिया निशान लग गया है।

दो अफसर राजनीति का शिकार

भेल के दो अफसरों का राजनीति का शिकार होने की खबर काफी चर्चाओं में है। अब लोग कहने लगे है किे बड़ें बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले। चर्चा है कि साल 2011 में अपर महाप्रबंधक बने एक अफसर काटीएक्सएम से तबादला कर दिया गया। एक तो सात साल से प्रमोशन नहीं मिला उस पर तबादला जरूर मिल गया। प्रशासनिक स्तर पर यह कहा जााने लगा है कि इनकी जगह जिस अपर महाप्रबंधक को भेजा है वह एक उद्योगपति के खास हैं। इन्हीं के कहने पर उन्हें मलाईदार विभाग में भेजा गया है। इस उद्योगपति के उक्त अफसर से क्या लाभ शुभ जुड़े हैं यह तो वे ही जाने। यह कहा जाने लगा है कि टीएक्सएम में रहते उक्त अपर महाप्रबंधक को अगले माह प्रमोशन में फायदा मिल सकता है। इधर एचआर विभाग में लंबे समय तक काम करने वाले एक उप महाप्रबंधक को राजनीति का शिकार होना पड़ा। अब उनका तबादला ट्रेक्शन सेल्स में कर दिया है। वैसे भी यह चर्चा है कि इंजीनियरिंग के अफसर को एचआर में जमने नहीं दिया जाता। खास बात यह है कि बाहर की यूनिट में काम कर रहे एक ईडी के यह खास माने जाते हैं इसलिए भी राजनीति का शिकार होने की चर्चाएं की जा रही है।

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