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अय्यर पर ऐक्शन: सियासी मजबूरी या बदली शैली

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नई दिल्ली

कांग्रेस के सीनियर नेता मणिशंकर अय्यर के ‘नीच’ कॉमेंट के बाद गुरुवार को गुजरात विधानसभा में सियासी घमासान हुआ। पीएम नरेंद्र मोदी ने सूरत की जनसभा में इसे गुजराती अस्मिता से जोड़कर पेश किया, लेकिन जिस अंदाज में कांग्रेस ने मणिशंकर अय्यर के इस विवादित कॉमेंट से आनन-फानन में निबटने की जल्दबाजी दिखाई, उससे राजनीतिक मजबूरी के साथ-साथ राहुल का बदला अंदाज भी सामने आया।

कांग्रेस के एक नेता ने गुरुवार को एनबीटी से कहा, ‘राहुल गांधी ने मणिशंकर अय्यर और अपने पिता राजीव गांधी के करीबी मित्र को कांग्रेस से सस्पेंड कर न सिर्फ कांग्रेस के लिए डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की, बल्कि पार्टी के अंदर और बाहर भी सख्त संदेश दिया, जिसका गुजरात चुनाव के बाद भी असर पड़ेगा।’

गुजरात में 9 नवंबर को पहले चरण में होने वाले चुनाव से ठीक पहले मणिशंकर अय्यर के बयान से किनारा करना कांग्रेस की राजनतिक मजबूरी थी। इसके लिए चंद घंटों में राहुल ने अन्य नेताओं से बात की। इसके बाद हिंदी-अंग्रेजी में ट्वीट कर राहुल ने न सिर्फ इस बयान से किनारा किया, बल्कि मणिशंकर से माफी मांगने को भी कह दिया।

वहीं बीजेपी इस बयान का भरपूर राजनीतिक लाभ उठाने में जुट गई है। अभी पीएम मोदी गुजरात में 11 और रैलियां करने वाले हैं। इसलिए और नुकसान से बचने के लिए पार्टी ने मणिशंकर को हटाने का फैसला कांग्रेस ने गुरुवार को देर रात तक ले लिया।

पार्टी की कमान औपचारिक रूप से संभालने से पहले राहुल ने संदेश भी दे दिया कि इस तरह की लापरवाही पार्टी में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार राहुल कपिल सिब्बल से भी नाराज थे, जिनके सुप्रीम कोर्ट में स्टैंड से पार्टी की फजीहत हुई। राहुल का कांग्रेस अध्यक्ष बनने का औपचारिक ऐलान 11 दिसंबर को होने को उम्मीद है।

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