Home राष्ट्रीय आंदोलन के नाम पर नक्सलियों ने बनाए करोड़ों

आंदोलन के नाम पर नक्सलियों ने बनाए करोड़ों

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नई दिल्ली

नक्सल आंदोलन और गरीबों के हक के लिए लड़ने के नाम पर निर्दोष युवकों को गुमराह करने वाले नक्सल नेता खुद आलीशान जीवन बिताते हैं। न सिर्फ बड़े शहरों में बड़ा घर रखते हैं बल्कि महंगी गाड़ियों पर चलते हैं और अपने बच्चों को महंगे डोनेशन वाले कॉलेजों में पढ़ाते हैं। नक्सल नेताओं के इस दोहरे चरित्र का खुलासा हुआ है जांच एजेंसियों की ओर से किए गए जांच में। जांच में पता चला है कि दर्जनों नेताओं ने अरबों रुपये की संपत्ति नक्सल लड़ाई में उगाही के रास्ते बनाई। ये अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने में लगे हैं।

जांच में पता चला कि नक्सल आंदोलन के नाम पर इन नेताओं ने पैसे जुटाए और उसका उपयोग अपने हितों के लिए किया। इस जांच में पता चला कि नक्सल नेता प्रद्युम्न शर्मा ने अपने भतीजे का प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में ऐडमिशन के लिए 32 लाख रुपये दिए। वहीं एक दूसरे नक्सल नेता संदीप यादव ने 15 लाख रुपये दिए। इन्होंने इतने ही पैसे नोटबंदी में भी बदले थे। संदीप यादव के बेटे और बेटी प्राइवेट मेडिकल और इंजिनयरिंग कॉलेज में पढ़ते हैं।

ऐसे ही एक अन्य नक्सल कमांडर अरविन्द यादव ने अपने भाई का ऐसे ही कालेज में 22 लाख देकर ऐडमिशन कराया। जबकि इन तीनों पर अपनी यूनिट में युवाओं की भर्ती कराने का दायित्व था और सैकड़ों युवाओं को पढ़ाई छुड़वाकर हिंसा की आग में जोड़ दिया। ईडी की जांच के अनुसार मगध जोन के स्पेशल कमांडर प्रद्युम्न शर्मा 2010 से 2016 के बीच 31 लाख रुपये की जमीन खरीदी, जबकि पैतृक जमीन पर 35 लाख रुपये का मकान बनवाया। वहीं बिहार-झारखंड में सीपीआई माओवादी संदीप यादव ने दिल्ली के द्वारिका में 2 बेडरूम का फ्लैट खरीदा, 3 शहरों में जमीन खरीदी।

एक और नक्सल नेता संतोष झा ने कोलकोता में 2 बड़े मकान खरीदे। होम मिनिस्ट्री के सूत्रों के अनुसार इन सभी संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। होम मिनिस्ट्री के सूत्रों के अनुसार नक्सल नेताओं की फंडिंग पर अंकुश लगाकर बड़ी कामयाबी मिल रही है। अधिकारियों के अनुसार नक्सल नेताओं की ओर खुद के आलीशान जीवन जीने और दूसरों की जान जोखिम में डालने की बात सुनकर कई युवा भी उनसे अलग हो रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकारें ऐसे गुमराह युवकों को दोबारा मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही हैं।

मालूम हो कि नक्सल ऑपरेशन में हाल में मिली सफलता से उत्साहित मोदी सरकार अगले कुछ महीने में कम से कम 20 और जिलों को नक्सलमुक्त कराने का लक्ष्य बनाया है। होम मिनिस्ट्री की एक हाई लेवल मीटिंग में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के 20 ऐसे जिलों की पहचान की जिसे इस साल तक नक्सलमुक्त करना है। यह लक्ष्य हाल में नक्सल ऑपरेशन में मिली सफलता में बाद नए सिरे से तय किया गया है।

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