Home फीचर उदारवादी मूल्यों का सफाया खतरनाक चलन: हाई कोर्ट

उदारवादी मूल्यों का सफाया खतरनाक चलन: हाई कोर्ट

0 42 views
Rate this post

मुंबई

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में हत्या का जिक्र करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सभी विपक्षी और उदारवादी मूल्यों का सफाया एक खतरनाक प्रवृत्ति है और इससे देश की छवि खराब हो रही है। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

याचिका में अनुरोध किया गया है कि अदालत तर्कवादियों गोविंद पानसरे और नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की निगरानी की जांच करे। हाई कोर्ट ने कहा, ‘उदारवादी मूल्यों और विचारों के लिए कोई सम्मान नहीं है। लोग अपने उदारवादी सिद्धांतों के कारण लगातार निशाना बनाए जा रहे हैं। सिर्फ विचारक ही नहीं बल्कि कोई व्यक्ति या संगठन जो उदारवादी सिद्धांतों में विश्वास करता है, निशाना बन सकता है। यह ऐसा है जैसे अगर मेरा कोई विरोध है तो मैं उस व्यक्ति का सफाया करा दूं।’

पीठ ने कहा, ‘सभी विपक्ष की हत्या का चलन खतरनाक है। इससे देश की छवि खराब हो रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और महाराष्ट्र अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईडी) ने दाभोलकर और पानसरे हत्या मामलों में क्रमश: अपनी जांच रिपोर्टें दाखिल कीं। पीठ ने कहा कि अधिकारियों द्वारा अब तक की प्रगति कोई ठोस नतीजे तक पहुंचने में नाकाम रही है।’

हाई कोर्ट ने कहा, ‘जबकि आपके (जांच एजेंसियों के) प्रयास वास्तविक हैं लेकिन तथ्य यहीं हैं कि प्रधान आरोपी अब भी फरार है। मामले में हर स्थगन के बीच एक और कीमती जान जा रही है। अदालत ने कहा कि पिछले महीने एक और कीमती जान चली गयी, जब एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, बेंगलुरु में एक उदारवादी, समान सोच वाली एक महिला की हत्या हो गयी।’ पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों को अपनी जांच की लाइन बदलनी चाहिए और हत्यारों को पकड़ने के लिए तकनीक का उपयोग करना चाहिए।

दोस्तों के साथ शेयर करे.....