Home फीचर उन्नाव गैंगरेप केस: आरोपी MLA के गांव में दबी जुबान यह चर्चा…

उन्नाव गैंगरेप केस: आरोपी MLA के गांव में दबी जुबान यह चर्चा…

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उन्नाव

उन्नाव शहर हो या यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर बसा माखी गांव… हर जगह चर्चा सिर्फ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उन पर लगे आरोपों, उनके दबदबे और दबंगई की हो रही है। वजह है उनका चार बार से विधायक होना। गांव के लोग दबी जुबान में चर्चा कर रहे हैं कि सरकार कोई भी रही हो उन्नाव में सिक्का सेंगर का ही चलता है, लेकिन इतने सालों में पहली बार है जब कोई उनसे इस तरह मोर्चा ले रहा है।

नाना की राजनीतिक विरासत को संभाला
मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले कुलदीप सिंह सेंगर माखी गांव में अपने ननिहाल में पले-बढ़े। गांव के सलिल बताते हैं कि आजादी के बाद से ही गांव की प्रधानी सेंगर परिवार के पास रही। सिर्फ दो मौके ऐसे रहे, जब गांव की प्रधानी उनके हाथ से गई।

आजादी के बाद उनके नाना बाबू सिंह गांव के 36 साल तक प्रधान रहे। उसके बाद 1987-88 में कुलदीप सिंह सेंगर गांव के प्रधान बने और साढ़े सात साल तक प्रधानी की। 2000 से 2010 तक कुलदीप सिंह की मां चुन्नी देवी गांव की प्रधान रहीं। वर्तमान में हत्या के आरोप में जेल में बंद कुलदीप के भाई अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह प्रधान हैं जबकि कुलदीप सिंह की पत्नी संगीता सेंगर जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।

बदलता रहा दलों का साथ
कुलदीप सिंह सेंगर ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस से की। वह लंबे समय तक यूथ कांग्रेस से जुड़े रहे। 2002 में बीएसपी के टिकट पर सेंगर ने उन्नाव की सदर सीट से जीत हासिल की। 2007 में वह एसपी से जुड़ गए। बांगरमऊ सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए। 2012 में भगवंत नगर से एसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। 2017 के चुनाव से ठीक पहले वह बीजेपी में शामिल हो गए और बांगरमऊ से जीत हासिल कर फिर सरकार के साथ हो लिए।

प्रधानी के चुनाव से शुरू हुई थी रंजिश
विधायक और उन पर आरोप लगाने वाले परिवार के बीच रंजिश को हवा 2015 के प्रधानी चुनाव के दौरान मिली थी। मृतक बंदी की पत्नी प्रधानी के चुनाव में खड़ी हुई थी जबकि मुकाबला अतुल सिंह की पत्नी अर्चना से था। चुनावों से ही दोनों परिवारों में मनमुटाव शुरू हो गया था, हालांकि बाद में मृतक बंदी की पत्नी ने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद आरोप लगाने वाले परिवार की तरफ से छह महीने पहले विधायक के खिलाफ पर्चे छपवाकर बंटवाए गए।

राजनीतिक छवि पर हमले से और बढ़ी रंजिश
राजनीतिक छवि पर हमले ने इस रंजिश को और बढ़ा दिया। गांव के लोगों के मुताबिक इसमें एक तरफ विधायक की रावण की तरह दस सिर वाली तस्वीर और दूसरी तरफ आरोप लगाने वाली लड़की के चाचा की तस्वीर थी। इसमें लड़की के चाचा को बीजेपी का सदस्य बताया गया था। पर्चे में विधायक पर भ्रष्टाचार, जमीन पर कब्जे से लेकर यौनशोषण समेत तमाम गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसको लेकर विधायक की तरफ से तीन मामले भी दर्ज करवाए गए। इन पर्चों का जिक्र विधायक और मृतक बंदी के भाई की बातचीत के कथित ऑडियो क्लिप में भी है।

सरकार किसी की भी रही उन्नाव में सेंगर का रहा दबदबा
कुलदीप सिंह सेंगर का अपने क्षेत्र में दबदबा हमेशा कायम रहा है। जब जिस पार्टी की सरकार रही सेंगर उस पार्टी में शामिल रहे। यही वजह है कि सूबे में सरकारें बदलती रहीं लेकिन अपने क्षेत्र में उनका दबदबा बना रहा। उन्होंने अपने परिवार को भी राजनीति में आगे बढ़ाया। पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं और उनके भाई अतुल सिंह की पत्नी अर्चना ग्राम प्रधान हैं।

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