Home मिर्च- मसाला और साहब को बना दिया एचओडी

और साहब को बना दिया एचओडी

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भोपाल

संय्या भये कोतवाल को डर काहे का यह परिपाटी कारखाने के टीजीएम विभाग में चल रही है। मुखिया ने अपने चहेते सीनियर डीजीएम को इस विभाग का एचओडी बनाकर सबको सकते में डाल दिया है, अब विभाग के लोग कहने लगे हैं कि जब साहब मेहरबान है तो वह कुछ भी कर सकते हैं। चर्चा है कि भेल कारखाने में करीब 150 अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों की लंबी फौज है तो फिर वरिष्ठ उप महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को विभाग का एचओडी कैसे बना दिया। जबकि वह एचओडी बनने के इनटाईटल ही नहीं है।

चर्चा है कि राज को राज ही रहने दो की की तर्ज पर खास चहेते को उपकृत करने के लिए यह भी नहीं सोचा कि टीजीएम विभाग में एक भी अपर महाप्रबंधक नहीं है। इस विभाग का काम अपने ही चहेते एक सीनियर डीजीएम को फ्री हेंड सौंप दिया। यहां ईसीसी के रोटर खरीदी का मामला चर्चाओं में है। वर्टीकल मशीन सेन्टर खरीदी का मामला भी ठण्डे बस्ते में बंद है। इस मामले में कार्पोरेट प्रबंधन ने भी मौन धारण कर रखा है तो यह बात ईडी साहब के गले नहीं उतर रही है, इस मामले की निष्पक्ष जांच कराये ताकि विभाग में फिजूलखर्ची करने वालों पर लगाम लग सके।

अब तो हद हो गई इंतजार की

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड भेल की सभी यूनिटों में अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक स्तर के अफसरों के साक्षात्कार के बाद भी प्रमोशन लिस्ट जारी न होने से वह कहने लगे हैं कि अब तो हद हो गई इंतजार की। 2011 के बाद यानी 6 साल में यह पहला मौका है कि यह प्रमोशन लिस्ट चार माह में भी जारी नहीेें हो सकी। इसको लेकर सभी वर्ग के अधिकारी आश्चर्य चकित है। दरअसल राजनीति के चलते कार्पोरेट के मुखिया भी असहाय दिखाई दे रहे है। वह यह सोचने पर मजबूर हो गये है कि ऑर्डरों की कमी से जूझ रही कंपनी में राजनीतिक सिफारिश वाले अफसरों को प्रमोशन दें या फिर कंपनी के काबिल अफसरों को आगे बढ़ायें। चर्चा है कि इसी को लेकर संभवत: यह प्रमोशन लिस्ट पिछले शनिवार को जारी होते-होते रूक गई। दरअसल इस दिन एमसीएम की बैठक भी थी इसलिए प्रमोशन के इंतजार कर रहे अफसरों को काफी उम्मीदें थी। यूं तो हर माह लिस्ट का इंतजार करते अफसर नजर आते है।
लेकिन वह अब कहने लगे हैं कि अब तो हद हो गई इंतजार की।

बात क्वालिटी सर्किल के सेमिनार की

भेल जैसी महारत्न कंपनी आज कल सबसे ज्यादा ध्यान भेल निर्मित जॉब क्वालिटी पर फोकस किये हुए है। इसमें बेहतर सुधार के लिए क्वालिटी सर्किल का पांच दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार 30 नवंबर से मैसूर में आयोजित किया जायेगा। जहां सारे पब्लिक सेक्टर के क्वालिटी के नम्बर वन प्रतिनिधियों को भेजा जायेगा। हर जगह से क्वालिटी सर्किल से पांच-पांच प्रतिनिधि भेजे जायेंगे। मजेदार बात यह है कि लेकिन अडिय़ल रवैये के चलते भोपाल यूनिट से एक ग्रुप से सिर्फ दो प्रतिनिधि भेजे जाने की चर्चाएं हैं । ऐसे में क्वालिटी विभाग में कार्यरत काबिल कर्मचारी जो करोड़ों के जॉब की लागत अपनी काबिलियत से लाखों में कर देते है उनमें निराशा छा गई है। सिर्फ एक ग्रुप से दो लोग राष्ट्रीय सेमिनार में भेल का प्रस्तुतिकरण कैसे देंगे यह चर्चाओं का विषय है। जबकि पिछली बार एक ग्रुप से पांच प्रतिनिधि गये थे। इधर भेल की गोविन्दपुरा सिविल आफिस के एक सुपरवाइजर का मामला भी काफी चर्चाओं में है। यह साहब गत दिवस एक एन 2 टाईप क्वार्टर की चेकिंग करने गये तो वहां झड़प हो गई। यह काम इनका था या नहीं लेकिन मामला एक महिला से जुड़ा होने के कारण थाने तक पहुंच गया।

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