Home मिर्च- मसाला और सीआईएम से हटा दिये

और सीआईएम से हटा दिये

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भोपाल

लंबे समय से जमें फीडर्स ग्रुप के सीआईएम विभाग के एक अपर महाप्रबंधक के विभाग को बातों ही बातों में बदल डाला। चर्चा है कि ग्रुप के मुखिया कई आरोपों में घिरे एक अपर महाप्रबंधक को बचाने के चक्कर में सीआईएम विभाग में ले आये, जबकि इस विभाग में पहले से ही एक एजीएम काम रही है। मजेदार बात यह है कि खास चहेते को उपकृत करने के लिए ग्रुप के मुखिया ने यह भी नहीं सोचा कि टूल एण्ड गेज विभाग में एक भी अपर महाप्रबंधक नहीं है। इस विभाग का काम अपने ही चहेते एक सीनियर डीजीएम को फ्रीहेंड सौंप दिया। विभाग के कर्मचारी कहते नजर आ रहे है कि इस विभाग में ही सबसे ज्यादा गोलमाल है। जब प्रेस शॉप का सारा काम जगदीशपुर में हो रहा है तो ऐसे में सीआईएम के एजीएम को यहां भेजने की क्या जरूरत आन पड़ी। क्या ग्रुप के मुखिया एक एजीएम को ईडी को अंधेरे मेें रख जांच से बचाने की कोशिश कर रहे है यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

भेल भोपाल ईडी बनने की आहट

कोई माने या न माने लेकिन भेल के कुछ आला अफसर आज भी ईडी डीके ठाकुर के रहते भेल भोपाल के ईडी बनने की चाहत बनाये हुए हैं। भले ही कोई यकीन करे या न करे एक केन्द्रीय मंत्री के दबाव मेंं यह काम बदस्तूर जारी है। चर्चा तो यहां तक है कि वर्तमान ईडी को दिल्ली कार्पोरेट या किसी अन्य यूनिट में भेजा जा सकता है। अब देखना यह है कि मंत्री के दबाव के बाद भी सीएमडी की चलती है तो श्री ठाकुर ही यहां के ईडी बने रहेंगे या फिर सीएमडी साहब मंत्री जी के दबाव में आ गये तो बाहर जायेंगे। यूं तो अगले साल दो डायरेक्टर के पद भी खाली हो रहे हैं, ऐसे में उन्हें डायरेक्टर भी बनाया जा सकता है। भोपाल ईडी बनने के लिए कुछ अफसर तो सप्लायर और भेल भोपाल के एक नेता के माध्यम से पूरी ताकत झोंके हुए है। मुंबई के एक गोल्डमेन ट्रांसफॉर्मर ऑयल सप्लायर की भी भोपाल ईडी बनाने के मामलेे में अहम भूमिका बताई जा रही है। चर्चा है कि तत्कालीन ईडी आरके सिंह की स्टाइल में यह काम तेजी से जारी है। अब इस काम में कौन कितना सफल हो पायेगा यह तो वक्त ही बतायेगा।

मामला भेल के टीजीएम विभाग का

वैसे भी भेल कारखाने का टीजीएम विभाग कई मामलों में चर्चाओं में है। उस पर विभाग के अफसरों ने नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए अपनी मनमर्जी से विभाग की चिप्स उठाने का काम दे दिया। दरअसल यह काम डब्ल्यूई विभाग के अन्तर्गत होता है लेकिन लाभ शुभ के चलते विभाग के अफसरों ने जो काम एफसीएक्स विभाग करीब 265 रूपये प्रति टन में करता है उस काम को टीजीएम विभाग ने करीब 410 रूपये प्रति टन में दे डाला। विभाग मेंं चर्चा है कि वैसे भी यह काम एफसीएक्स विभाग ही देखता है ऐसे मेें नियम से हटकर टूल एण्ड गेज विभाग ने यह कारनामा अकेले कैसे कर दिखाया यह चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले मेें न तो फायनेंस और न ही डब्ल्यूई विभाग के मुखिया कुछ खास कर दिखा पाये। ऐसा लगता है कि टीजीएम विभाग ने कंपनी को नुक सान पहुंचाने की जैसे कसम ही खा रखी है। विभाग के कर्मचारी कहने लगे हैं कि अब भेल के मुखिया ही कड़ा कदम उठायेंगे तब ही विभाग के गलत कामों पर अंकु श लग सकेेगा।

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