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कठुआ गैंग रेप मामले में रैली में शामिल दो बीजेपी मंत्रियों का कच्चा चिट्ठा

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जम्मू

जम्मू कश्मीर में आठ साल की एक बच्ची के गैंगरेप व हत्या के आरोप में गिरफ्तार स्पेशल पुलिस अधिकारी को रिहा किए जाने की मांग करने वाली रैली में बीजेपी के दो मंत्रियों की मौजूदगी कुछ ऐसी थी, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

हिंदू एकता मंच द्वारा आर्गेनाइज़ किए गए एक इवेंट में वनमंत्री चौधरी लाल सिंह तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री चंदर प्रकाश गंगा शामिल हुए. हिंदू एकता मंच कठुआ रेप व मर्डर केस में हुई गिरफ्तारियों का विरोध कर रहा है. दोनों मंत्रियों ने रैली को संबोधित किया और गिरफ्तारियों को जंगल राज का नतीजा बताया. चंदर प्रकाश गंगा ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि उन्होंने 14 साल, 22 साल, 28 साल व 37 साल के लोगों को क्यों गिरफ्तार किया? यह कैसे संभव है?”

कथित तौर पर, भाजपा के दूसरे विधायक चौधरी लाल सिंह ने भी आंदोलनकारियों का बेशर्मी से समर्थन किया और पूरे पुलिस जांच पर सवालिया निशान लगाया. सिंह ने कहा था, “यदि आप आंदोलन करते हैं तो इसे पूरे मन से करें नहीं तो घर पर बैठें. यह धारा 144 क्या है? एक लड़की मरी है और उसके लिए इतनी जांच. यहां बहुत सी औरतों की मौते होती रही हैं.”

कहा जा रहा है कि एक वीडियो जो कि 4 मार्च को बनाया गया, वह सामने आया है जिसमें सिंह कह रहे हैं कि पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं करती जो लोग भारत विरोधी नारे लगाते हैं, तिरंगे को जलाते हैं. लेकिन उन्होंने यहां लोगों को गिरफ्तार कर लिया. मै चाहता हूं कि आप अपने संकल्प पर बने रहें मै आपके साथ हू. मैं सीबीआई से जांच कराए जाने की आपकी मांग में आपके साथ हूं.

कथित रिपोर्ट के अनुसार, कठुआ में गुज्जर और हिंदू समुदाय के बीच संभावित तनाव की आशंका है. सीबीआई द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में कहा गया है कि बकरवाल समुदाय के लोगों को रासना गांव से भगाने के लिए इस घटना को अंजाम दिया गया. यह पहली बार नहीं हुआ है जब ये दोनों बीजेपी नेता विवादों में रहे हैं. इससे पहले भी ये दोनों इस तरह का बयान देते रहे हैं.

मई 2016 में, जब एक गुर्जर समुदाय का एक समूह अपने बाग की भूमि से जुड़े मुद्दे के संबंध में जम्मू में चौधरी लाल सिंह के निवास पर गया था, तो कथित रूप से उन्होंने 1947 में मुसलमानों के नरसंहार को दुबारा करने की धमकी दी. सिंह का इशारा नवंबर 1947 में हुई उस घटना की तरफ था जिसमें डोगरा शासक हरि सिंह की आर्मी की अगुवाई में अर्धसैनिक बलों द्वारा मुसलमानों का नरसंहार किया गया था. इसके बाद गुज्जर समुदाय के लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई थी. जब विपक्ष व अलगाववादी नेताओं ने उनसे त्यागपत्र की मांग की तो उन्होंने त्यागपत्र देने से मना कर दिया.

लेकिन बाद में सिंह ने मीडिया को बताया कि गुज्जर समुदाय को लोग वन अधिकारियों से लकड़ी से लदे हुए उनके ट्रकों को छुड़वाने के लिए आए थे. और मैने उनको ये कहकर मना कर दिया कि पेड़ों के काटने के कारण आज जम्मू का तापमान 47 डिग्री सेंटीग्रेट है.

मार्च 2015 में लाल सिंह स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री थे तो जम्मू कश्मीर में एक महिला डॉक्टर ने उनके ऊपर सार्वजनिक रूप से अभद्रता करने का आरोप लगाया था. यह घटना कैमरे में भी कैद हो गई थी. सिंह उस समय 1996 व 2002 में बशोली विधानसभा क्षेत्र से चुने गए थे. 2004 व 2009 में ऊधमपुर लोकसभा क्षेत्र से वो सांसद चुने गए. हालांकि 2014 में कांग्रेस द्वारा टिकट न दिए जाने पर उन्होंने कांग्रेस छोड़कर कठुआ में अमित शाह की उपस्थिति में बीजेपी ज्वाइन कर लिया.

दूसरे बीजेपी मंत्री चंदर प्रकाश गंगा ने भी कहा कि हम भी चाहते है कि अपराधियों को सज़ा मिले लेकिन हम इसके विरोधी है कि किसी को भी पकड़ के बंद कर दिया जाए. पिछले साल गंगा ने मीडिया से कहा था पत्थर फेंकने वालों को गोली से जवाब देना चाहिए और इसके बाद वो कभी भी पत्थर नहीं फेंकेंगे. हालांकि बाद में उन्होंने इसके लिए माफी मांग ली थी. इससे पहले भी उनके गुज्जर समुदाय के साथ खराब संबंध उजागर हुए थे. 2015 में गंगा ने कहा था कि एम्स के निर्माण के लिए संबा जिले से गुज्जर लोगों को बाहर निकाल देना चाहिए.

2014 के चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने कहा था कि अगर मैं चुना जाऊंगा तो जो कुछ भी हो सरोर व वीजापुर से मुसलमानों को बाहर निकाल दूंगा. गंगा जो कि विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक है उनके ऊपर स्थानीय लोगों द्वारा आरोप लगाया गया था कि 2008 की अमरनाथ यात्रा के दौरान उन्होंने गुज्जर मुसलमानों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण माहौल बनाने का काम किया था.

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