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कर्नाटक के लोग उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे नहीं हैः सिद्धारमैया

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बेंगलुरू

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने विवादास्पद बयान देकर ‘कांग्रेस की मदद’ की है.अनंत कुमार हेगड़े ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी संविधान बदलने के लिए सत्ता में आई है.उन्होंने कहा, “आख़िर भाजपा संविधान क्यों बदलना चाहती है? क्यों भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह कह रहे हैं कि अनंत कुमार हेगड़े के बयान से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है? वो उन्हें (अनंत कुमार हेगड़े को) मंत्रालय से क्यों नहीं हटा देते और पार्टी से क्यों नहीं निकालते हैं?”

“भाजपा आरक्षण विरोधी है. अगर पार्टी संविधान, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती है तो उन्हें संविधान को बदलने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए था. क्या इस पार्टी ने कभी कहा कि वो मंडल कमीशन की रिपोर्ट या रिजर्वेशन का समर्थन करती है.”

हेगड़े के संविधान को बदलने वाले बयान और उसके बाद सार्वजनिक मंच से दिए गए उनके कुछ भाषणों से कर्नाटक के दलितों में नाराज़गी है. भाजपा में मौजूदा दलित नेताओं ने मैसूरू में हुई बैठक के दौरान अमित शाह से दलितों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया था. लेकिन, ये बैठक शोर-शराबे के साथ ख़त्म हो गई क्योंकि दलित जानना चाहता थे कि हेगड़े को बर्खास्त क्यों नहीं किया गया.

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग पर कांग्रेस का विरोध करने वाले अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने कहा, “मुद्दा यह है कि केंद्र सरकार राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग की स्वायत्ता छीनना चाहती थी. वो इसका राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं.”

सिद्धारमैया भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के उस दावे पर हंसते हैं जिसमें उन्होंने (येदियुरप्पा) कहा था कि अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलित का विश्वास कांग्रेस से कम हुआ है और भाजपा को उनका समर्थन हासिल हो रहा है.उन्होंने कहा, “कांग्रेस को हमेशा से इन वर्गों के वोट मिले हैं क्योंकि पार्टी सामाजिक न्याय में विश्वास रखती है, जिसमें भाजपा का यकीन नहीं है.”

जब उनसे पूछा गया कि वो इकलौते ऐसे कांग्रेसी नेता हैं जिनमें यह आत्मविश्वास है तो सिद्धारमैया ने कहा, “मैं सौ फ़ीसदी आश्वस्त हूं क्योंकि मैं मुख्यमंत्री हूं.”लेकिन सिद्धारमैया ने ये भी कहा कि पार्टी ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने वाली सिफारिश के अपने फ़ैसले को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया.”उस सिफारिश से राजनीतिक फायदा उठाने का हमारा इरादा कभी नहीं रहा. इस फ़ैसले से न तो हमें फ़ायदा होगा और ना ही नुकसान.”

सिद्धारमैया इस बात से बिलकुल चिंतित नहीं दिखें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में एक के बाद एक कई रैलियां कीं. उनका मानना है कि प्रधानमंत्री की रैलियों से चुनाव पर “कोई असर नहीं” होगा.उन्होंने कहा, “कोई असर नहीं होगा. उनके (प्रधानमंत्री के) लिए यह संभव नहीं है कि वो बदलाव ला सकें. कर्नाटक में उनका योगदान क्या है? चार सालों में उन्होंने सूखे के दौरान मदद के हमारे अनुरोध का जवाब तक नहीं दिया.”

सिद्धारमैया ने आगे कहा, “क्या प्रधानमंत्री इस तरह बात करते हैं. वो गुजरात के मुख्यमंत्री नहीं, देश के प्रधानमंत्री हैं.””इंदिरा गांधी के काम करने के तरीके को देखिए, कैसे उन्होंने चेन्नई के लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की थी, जबकि तमिलनाडु तब उस कृष्णा जल विवाद का हिस्सा नहीं था जो तब के आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच चल रहा था. एक प्रधानमंत्री इसी तरह काम करते हैं.”

सिद्धारमैया मानते हैं कि “भाजपा हमेशा मुद्दों को जिंदा बनाए रखना चाहती है. यही उसकी रणनीति है. क्या उसने राम मंदिर का निर्माण करवाया?”वो इस बात से आश्वस्त हैं कि “मोदी की लोकप्रियता उस तरह की नहीं रही जैसी 2014 में थी. उनका न सिर्फ़ आकर्षण कम हुआ है बल्कि उनका प्रभाव भी घटा है. कर्नाटक के लोग उत्तर प्रदेश या गुजरात की तरह नहीं हैं.”

सिद्धारमैया यह मानते हैं कि कुछ जगहों पर कांग्रेस विधायकों से लोग नाराज़ ज़रूर हैं पर “सरकार से किसी तरह की नाराज़गी नहीं है.” वो यह दलील देते हैं कि सरकार ने सामाजिक कल्याण के कार्यक्रम चलाए हैं. उनकी सरकार ने ग़रीबी, शिक्षा, महिला, किसान और आम लोगों के हित में काम किया है.

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