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कर्नाटक चुनाव: आखिर में जाति समीकरण से तय होगी जीत और हार

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बेंगलुरु

कर्नाटक में 12 मई को चुनाव होने हैं। आखिरी समय में तीनों बड़ी पार्टियों कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस ने चुनाव अभियान तेज कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि सभी बड़ी पार्टियां विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बात कर रही हैं, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। वास्तव में राज्य में जाति समीकरण हावी होता दिख रहा है और इसी पर जीत-हार तय होगी।

तीनों पार्टियों द्वारा उतारे गए उम्मीदवारों को लेकर किए गए डेटा विश्लेषण इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं कि आखिर में उम्मीदवार की जाति से ही उसकी जीत सुनिश्चित होगी। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘राजनेता एक दूसरे पर सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्ष और अवसरवाद की बात कर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन सबसे कॉमन बात यहां यह है कि हम सभी जातिगत राजनीति के ही इर्द-गिर्द घूम रहे हैं।’ कांग्रेस के एक नेता ने भी कुछ ऐसी ही बात कही।

तीनों पार्टियों ने सबसे ज्यादा उम्मीदवार लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय से उतारे हैं। कांग्रेस ने 49 लिंगायतों और 46 वोक्कालिगा समुदाय के लोगों को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी ने 68 लिंगायतों और 38 वोक्कालिगा को मैदान में उतारा है। वहीं, JD(S) ने 41 लिंगायतों को और 55 वोक्कालिगा को टिकट दिया है।

राज्य में अनुसूचित जाति (SCs) और अनुसूचित जनजाति (STs) सम्मिलित रूप से सबसे बड़ी कास्ट पॉप्युलेशन है और ये तीनों बड़ी पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण है। राजनीतिक विश्लेषक नारायण ए. ने कहा, ‘जाति सचमुच में काफी महत्वपूर्ण है। कर्नाटक में होनेवाले चुनाव को किसी भी तरीके से देखें तो आपको पता चलेगा कि जाति ही केंद्र में है। जमीनी स्तर पर केवल जातिगत समीकरण ही फिट किए जा रहे हैं।’

शुरुआत से ही जातिगत गठबंधन पर पार्टियों का फोकस रहा है न कि विकास के अजेंडे पर जिसकी काफी चर्चा हुई है और अब भी हो रही है। वास्तव में, बीएस येदियुरप्पा को आगे रखने के पीछे भी लिंगायत समुदाय को लुभाने की ही रणनीति थी और इसके तहत जाति आधारित गणना भी की गई। ऐसा ही कुछ कांग्रेस के साथ भी रहा, जिसने कुरुबा और दूसरी पिछड़ी जातियों का वोट हासिल करने की कोशिश की है।

नारायण ने कहा, ‘कुरुबा, जो पिछड़ी जातियों में बड़ी संख्या में हैं, वे कांग्रेस के साथ आए हैं तो उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हैं। दरअसल सिद्धारमैया भी इसी समुदाय से आते हैं।’ पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी की पार्टी JD(S) ने भी वोक्कालिगा का वोट पाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है।

बीजेपी ने किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। कांग्रेस ने 17 और JD(S) ने 19 मुस्लिमों को टिकट दिए हैं। वास्तव में राज्य में मुसलमानों की आबादी 75 लाख से ज्यादा है और कांग्रेस व जेडीएस ने उनका वोट लेने के लिए पूरी कोशिश की है। एक मुस्लिम नेता ने TOI को बताया, ‘इस चुनाव में मुस्लिम वोट तेजी से एकजुट हो रहा है, जिसके बारे में ज्यादा लोग बात नहीं कर रहे हैं। मुस्लिम इस बार बड़ी भूमिका निभाएंगे।’ बीजेपी OBCs में दरार की बात कर रही है। उसका कहना है कि कई छोटी जातियों को लगता है कि कुरुबा की तुलना में सिद्धारमैया ने उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

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