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कर्नाटक चुनाव देश का पहला ‘WhatsApp इलेक्शन’: विदेशी मीडिया

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कर्नाटक

फेक न्यूज को लेकर अकसर सुर्खियों में रहने वाला व्हाट्सऐप एक बार फिर चर्चा में हैं. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में व्हाट्सऐप की भूमिका को लेकर विदेशी मीडिया ने इसे देश का पहला व्हाट्सऐप इलेक्शन बताया है. एनडीटीवी पर छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि अब आप बहस और रैलियों को भूल जाइए, भारत में अब चुनाव व्हाट्सऐप पर लड़ा और जीता जा रहा है. कर्नाटक में चुनाव के दौरान दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने दावा किया था कि उनकी पहुंच 20 हजार व्हाट्सऐप ग्रुप्स तक है और वो मिनटों में लाखों समर्थकों तक अपना संदेश पहुंचा सकते हैं.

दंगों को भड़काने के लिए हो रहा है इस्तेमाल
देखा जाए तो व्हाट्सऐप का इस्तेमाल बड़े स्तर पर सांप्रदायिक दंगों को भड़काने, नेताओं का बयान तोड़-मरोड़ कर पेश करने, मजाक उड़ाने और चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने में हो ही रहा है. श्रीलंका और म्यांमार में भड़काऊ व्हाट्सऐप मैसेज के चलते दंगे भी हुए हैं. भारत व्हाट्सऐप का बड़ा बाजार है. यहां करीब 20 करोड़ लोग व्हाट्सऐप इस्तेमाल करते हैं. यहां टेक्नोलॉजी को लेकर अशिक्षा और डिजिटल दुनिया तक नई-नई पहुंच ने व्हाट्सऐप के भड़काऊ इस्तेमाल को बढ़ाया है. यहां शुरू से ही भड़काऊ सूचनाओं का आदान-प्रदान किए जाते रहे हैं.

बीजेपी कांग्रेस के हैं कई व्हाट्सऐप वॉरियर्स
सोशल मीडिया के जरिए अपार सफलता हासिल कर देश के प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी खुद भी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. उनकी पार्टी बीजेपी के कई ग्रासरूट व्हाट्सऐप वॉरियर्स हैं और पार्टी की हजारों समर्थकों तक पहुंच है. कभी बीजेपी के समर्थक कांग्रेस पार्टी के विरोध में फेक न्यूज फैलाते हैं तो कांग्रेस के सर्मथक बीजेपी के विरोध में वही काम करते हैं.

कर्नाटक चुनाव ने खोला व्हाट्सऐप का राज
डेटा चोरी के मसले में फंसा फेसबुक अब व्हाट्सऐप को इन विवादों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है. व्हाट्सऐप का कहना है कि पिछले कुछ वक्त से राजनीतिक पार्टियां व्हाट्सऐप के जरिए लोगों को ऑर्गनाइज करने की कोशिश कर रही हैं. कर्नाटक चुनाव से कंपनी को इस बात का अंदाजा लगा है कि चीजें कैसे काम करती हैं. कैसे क्या हो रहा है. इससे अगले साल लोकसभा चुनावों के मद्देनजर भी हमें स्थिति को संभालने में मदद मिलेगी.

कंपनी का कहना है कि अगर सुरक्षा की बात है तो कंपनी व्हाट्सऐप और फेसबुक दोनों ही जगहों पर यूजर्स को ब्लॉक भी कर सकती है. चूंकि व्हाट्सऐप एक्जीक्यूटिव कंटेंट स्कैन नहीं कर सकते लेकिन वो फेसबुक से जुड़े व्हाट्सऐप नंबरों, और प्रोफाइल फोटो को जरिए अवांछित हरकतों की पहचान कर सकते हैं और वो भविष्य में ऐसा करने की मंशा भी रखते हैं.

क्या कहते हैं सोशल एक्टिविस्ट
इस मामले को लेकर सोशल एक्टिविस्टों का कहना है कि पूरी दुनिया में करोड़ों लोग व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं. कंपनी फेक न्यूज को लेकर इनपर लगाम नहीं लगा सकती है क्योंकि यह अब उनके हाथों से निकल चुका है. कंपनी खुद भी नहीं जानती की इससे कैसे निपटा जाए क्योंकि जो भी मैसेज भेजे या फॉरवर्ड किए जाते हैं उनके बारे में पता लगाना मुश्किल है और लोगों के लिए इसपर गलत जानकारी फैलाना बहुत आसान है. विशेषज्ञों की मानें तो व्हाट्सऐप का इन्क्रिप्शन फीचर लोकतंत्र के लिए खतरा है, खुद कंपनी नहीं जान सकती कि कौन क्या भेज या फॉरवर्ड कर रहा है.

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