Home राष्ट्रीय कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखें नहीं हुई थी लीक: चुनाव आयोग

कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखें नहीं हुई थी लीक: चुनाव आयोग

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की ऑफिशियल अनाउंसमेंट से पहले ही चुनाव की तारीखों का सोशल मीडिया पर खुलासा हो गया था. हालांकि चुनाव आयोग की इन्वेस्टिगेशन टीम ने चुनाव कार्यक्रम लीक होने से इनकार कर किया है. टीम ने कहा कि यह न्यूज चैनलों पर प्रसारित हुई अनुमानित खबरों का नतीजा है.

भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी अमित मालवीय, कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के सोशल मीडिया प्रभारी श्रीवत्स बी के चुनाव की तारीख पहले ही ट्वीट करने के मामले में चुनाव कार्यक्रम लीक करने के आरोप को इन्वेस्टिगेशन टीम ने नकार दिया. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मीडिया रिपोर्ट्स में चुनाव कार्यक्रम की अनुमान पर आधारित खबरें आती रही हैं. इसलिये इसे चुनाव कार्यक्रम लीक करना नहीं कहा जा सकता है.

गौरतलब है कि गत 27 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के प्रेस कांफ्रेंस में कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने से पहले ही मालवीय और श्रीवत्स ने ट्वीट के जरिए वोटिंग और काउंटिंग की तारीख का खुलासा कर दिया था.इस पर मामले को संज्ञान में लेते हुये रावत ने एक टीम का गठन किया. चुनाव कार्य्रकम लीक होने की जांच के लिए आयोग के महानिदेशक धीरेन्द्र ओझा की अगुवाई में चार सदस्यीय इन्वेस्टिगेशन टीम से एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा था.

आयोग की तरफ से शुक्रवार को सार्वजनिक की गयी इन्वेस्टिगेशन टीम की रिपोर्ट में चुनाव कार्यक्रम लीक होने के बारे में कहा कि ट्वीट पर शेयर की गयी जानकारी, दोनों समाचार चैनलों पर प्रसारित खबर पर आधारित थी.इन्वेस्टिगेशन टीम ने कहा कि समाचार चैनलों ने सूत्रों के हवाले से एक अनुमान पर खबर प्रसारित की थी. इसलिये इसे चुनाव की तारीखें लीक करना नहीं कहा जा सकता.

इन्वेस्टिगेशन टीम ने चुनाव कार्यक्रम अनाउंस करने की प्रक्रिया के पुख्ता होने की भी विस्तार से जांच की. जांच रिपोर्ट के अनुसार आयोग में चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया गया है. इसलिये चुनाव कार्य्रकम लीक होने की कोई संभावना नहीं है.

इन्वेस्टिगेशन टीम ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव कार्यक्रम को घोषणा के दौरान समाचार चैनलों को उत्तरदायी रवैया अपनाना चाहिए. टीम ने यह भी कहा कि ऐसे अवसरों पर राजनीतिक दलों के अनुमान के आधार पर ट्वीट करने से बचना चाहिए. इन्वेस्टिगेशन टीम ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम अनाउंस करने की आयोग की मौजूदा प्रक्रिया हालांकि बेहद पुख्ता है. लेकिन इसे और मजबूत बनाने व और भी गोपनीय बनाने के लिए समिति भविष्य में सुझाव देगी.

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