Home राज्य कर्नाटक: 40 वोटरों वाले सिद्धारमैया के गांव लौटी ‘जिंदगी’

कर्नाटक: 40 वोटरों वाले सिद्धारमैया के गांव लौटी ‘जिंदगी’

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मैसूर

कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों पर 12 मई को चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों की निगाहें एक-एक वोट पर है। बहरहाल, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जिस गृह जनपद के रहने वाले हैं, उस गांव में महज 40 मतदाता ही रहते हैं। सीएम सिद्धारमैया के गांव में इतने कम मतदाता होने की वजह क्या है यह सवाल भी आपके जेहन में आया होगा। दरअसल, लोग काम के सिलसिले में पलायन कर गए और गांव खाली होता चला गया।

बता दें कि सिद्धारमैया की मौजूदा विधानसभा वरुणा है जबकि इन दिनों उनका गांव अरलिकट्टे हुंडी महज 40 मतदाताओं की वजह से सभी राजनीतिक दलों की नजरों में है। इस गांव के ज्यादातर लोग पास के ही कस्बे की ओर पलायन कर गए और अब वे दिहाड़ी पर मजदूरी करते हैं।

इस तरह से लुभाने की कोशिश
चुनाव हैं तो प्रत्याशियों को गांव में रहने वाले मतदाताओं से वोट की अपेक्षा है, जिसकी वजह से लुभाने के लिए कोई कोरकसर नहीं छोड़ी जा रही है। कोई ग्रामीणों को मुफ्त बस सेवा की सुविधा मुहैया करा रहा है तो कोई दोपहर का खाना खिला रहा है और कोई अन्य चीजें मुहैया कराने में जुटा हुआ है।

ज्यादातर लोगों ने बदलवा लिया पता
गौरतलब है कि 10 साल पहले अरलिकट्टे गांव में तकरीबन 40 परिवार रहते थे, जिसमें 100 से ज्यादा मतदाता थे। लगातार पलायन के बाद ज्यादातर लोगों ने अब अपना वोट देने का पता भी बदलवा लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में सूखे की वजह से उन्हें गांव छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। गांव की तरकीबन 300 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। हालांकि, दीपावली के दौरान लोग एस सिद्धेश्वरा वार्षिक महोत्सव गांव में मनाते हैं।

मतदान के लिए की गई हैं तैयारियां
अरलिकट्टे गांव अभी तक पूरी तरह खाली नहीं हुआ है। अभी भी दो परिवार और चार लोग यहां रहते हैं। महादेवा स्वामी नाम के शख्स भी इस गांव में रहते हैं, जो कि केले की खेती कर रहे हैं। चुनाव को देखते हुए कई लोगों ने गांव वापस आकर वोट देने का मन बनाया है। गांव के चालीस मतदाताओं को मतदान कराने के लिए पंचायत विकास अधिकारियों द्वारा सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।

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