Home राष्ट्रीय कार्ति चिदंबरम की कंपनी को ₹26 लाख मिले: ईडी

कार्ति चिदंबरम की कंपनी को ₹26 लाख मिले: ईडी

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नई दिल्ली

एयरसेल-मैक्सिस मनी लॉन्ड्रिंग केस में 26 लाख रुपये पाने वाली कंपनी एडवांटेज स्ट्रैटिजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (एएससीपीएल) का पूरा नियंत्रण पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के पास था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली की एक अदालत में कार्ति और अन्य के खिलाफ दायर चार्जशीट में यह दावा किया है।

2 जी स्पैक्ट्रम आवंटन मामले से संबंधित यह आरोप-पत्र कार्ति चिदंबरम, एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टेंसीज प्राइवेट लिमिटेड, चेस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम के तहत दायर किया गया है। ईडी ने आरोप-पत्र में कहा है , ‘एएससीपीएल को कार्ति चिदंबरम के निर्देश पर बनाया गया था और कार्ति के पास ही पूरा नियंत्रण था।’ उसने कहा कि कंपनी बनाने के लिए रुपयों का इंतजाम भी कार्ति ने ही किया था। एएससीपीएल के सभी मामलों पर कार्ति का नियंत्रण था और आंतरिक ईमेल से पता चलता है कि कंपनी के कारोबार के हर पहलु पर उसका नियंत्रण था।

ईडी ने दावा किया कि मैक्सिस को शेयर बेचने वाली भारतीय कंपनी एयरसेल टेलिवेंचर लिमिटेड से एएससीपीएल को 26 लाख रुपये मिले थे। ईडी की ओर से दायर आरोप-पत्र में यह दर्शाने का प्रयास है कि यह भुगतान ‘परस्पर फायदे’ के लिए किया गया। आरोप पत्र में कहा गया है, ‘यह भुगतान इस मामले में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के तुरंत बाद किया गया।’ आरोप-पत्र में सौदे के बारे में कहा गया कि मैक्सिस ने एफडीआई के तौर पर 80 करोड़ डॉलर यानी करीब 3,565.91 करोड़ रुपये निवेश किया। वित्तमंत्री के पास तब महज 600 करोड़ रुपये तक के एफडीआई को मंजूरी देने का अधिकार था। इससे अधिक के एफडीआई को मंजूरी देने का अधिकार आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के पास था।

ईडी ने कहा, ‘इस मामले में बताया गया कि एफडीआई 180 करोड़ रुपये का होगा, जो मैक्सिस द्वारा अधिग्रहीत शेयरों के सममूल्य के बराबर था। हालांकि यह एफडीआई वास्तव में 3,565.91 करोड़ रुपये का था।’ ईडी ने कहा कि आरोप-पत्र में नामित एक अन्य कंपनी चेस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ऐसी कंपनी है, जिसका कार्ति प्रवर्तक था। इसे मैक्सिस और सहयोगी मलेशियाई कंपनियों से कथित सॉफ्टवेयर सेवाओं के लिए 90 लाख रुपये मिले थे। हालांकि 90 लाख रुपये के बदले दिए गए सॉफ्टवेयर मलेशियाई कंपनी के किसी काम के नहीं थे। ईडी ने इस मामले में कम से कम दो बार कार्ति चिदंबरग से पूछताछ की है। ईडी ने इस मामले में पी. चिदंबरम से भी कल दूसरी बार पूछताछ की।

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