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SC/ST ऐक्ट: SC में सरकार, आपके फैसले से बरपा हंगामा

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर हाल ही में दिए गए उसके फैसले ने इस कानून को कमजोर कर दिया है। इससे देश को बड़ा नुकसान हुआ है और इसमें सुधार के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार ने शीर्ष अदालत में कहा कि इस बेहद संवेदनशील मसले पर उसके फैसले ने देश में गुस्से, हंगामे और हिंसा का माहौल पैदा कर दिया है। सरकार ने साफ तौर पर रहा कि इस मामले में शीर्ष अदालत के फैसले से पैदा भ्रम को जजमेंट पर पुनर्विचार कर या फिर निर्णय को वापस लेकर खत्म किया जा सकता है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने लिखित रूप से सरकार की राय से शीर्ष अदालत को अवगत कराते हुए कहा कि उसने अनुसूचित जाति-जनजाति ऐक्ट, 1989 में सुधार की बात नहीं की। इसकी बजाय उसने इसके कुछ प्रावधानों में ही बदलाव कर दिया। यही नहीं अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को उसकी शक्तियों के बारे में बताते हुए कहा कि विधायिका और न्यायपालिका की शक्तिया अलग-अलग हैं। उन्होंने अपनी लिखित राय में कहा, ‘अदालत ने अनुसूचित जाति-जनजाति हिंसा निवारण अधिनियम में जो बदलाव किए हैं, उससे देश को बड़ा नुकसान हुआ है।’

केंद्र की मोदी सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा, ‘यह केस बेहद संवेदनशील है और इस पर फैसले के चलते देश में गुस्से, असहजता और सद्भाव खत्म होने का माहौल बना है।’ सीधे तौर पर कोर्ट को उसके अधिकार की याद दिलाते हुए उन्होंने लिखा कि हम एक लिखित संविधान के दायरे में चलते हैं। इसके तहत विधायिका, कार्यपालिका और न्यायालय की शक्तियों को बांटा गया है। इस मूलभूत ढांचे का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च के फैसले की प्रतिक्रिया में 2 अप्रैल को दलित संगठनों की ओर भारत बंद किए जाने के बाद सरकार ने यह राय दी है। यह भारत बंद हिंसक हो गया था और उसमें 8 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों घायल हो गए थे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए एससी-एसटी ऐक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने और अग्रिम जमानत के प्रावधान को मंजूरी देने का फैसला दिया था।

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