Home राजनीति क्या मोदी-देवगौड़ा बिगाड़ देंगे कांग्रेस का खेल?

क्या मोदी-देवगौड़ा बिगाड़ देंगे कांग्रेस का खेल?

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नई दिल्ली

कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस का मकसद एक है – दोनों पार्टियां कांग्रेस को अपने आखिरी गढ़ में सत्ता में लौटने से रोकना चाहती हैं। कभी JD(S) के दिग्गज नेता एचडी देवगौड़ा के करीबी रहे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कंधे पर कांग्रेस को सत्ता में बनाए रखने की जिम्मेदारी है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देवगौड़ा के बीच समीकरण पर चुनावी गणित टिका हुआ है।

हाल ही में पीएम मोदी ने जेडीएस चीफ की काफी तारीफ की थी और बताया था कि वह उनका काफी सम्मान करते हैं। बदले में, गौड़ा ने कहा कि मोदी भाषण देने की कला में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से ज्यादा तेज हैं। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया था कि कैसे PM ने 2014 में लोकसभा की सदस्यता छोड़ने से उन्हें रोक दिया था।

हालांकि इसके बाद की रैलियों में पीएम मोदी ने जेडीएस की तीखी आलोचना की और दावा किया कि पार्टी का कांग्रेस के साथ ‘गुप्त समझौता’ है। गौड़ा ने जोर देकर कहा कि निजी रिश्ते प्रधानमंत्री के साथ उनके राजनीतिक मतभेदों को कम नहीं कर सकते हैं। दोनों पार्टियों को पता है कि वे एक दूसरे को हटा नहीं सकते हैं।

इस संदर्भ में, दक्षिण कर्नाटक में चुनाव काफी महत्वपूर्ण हो गया है। 2013 के चुनावी मैप से साफ है कि जेडीएस का ज्यादातर प्रभाव इसी क्षेत्र में सीमित है, जहां बीजेपी मजबूत नहीं है। जेडीएस का यहां दबदबा है जबकि भगवा पॉकेट्स कुछ ही हैं और दूर हैं।

वास्तव में 5 साल पहले हुए विधानसभा चुनावों के दौरान दक्षिण कर्नाटक में ज्यादातर चुनाव क्षेत्रों में बीजेपी को वोट शेयर का 20% से कम ही मिला था। जबकि JD(S) का वोट शेयर 40% से ज्यादा था। ऐसे में साफ है कि क्षेत्र में दोनों पार्टियों में सीधे कोई मुकाबला नहीं है। मौजूदा घटनाक्रम में देवगौड़ा की पार्टी को अगर ज्यादा वोट शेयर मिलता है तो इससे कांग्रेस का शेयर घटेगा, जो बीजेपी के हित में होगा।

ओल्ड मैसूर क्षेत्र में खासतौर से कांग्रेस और जेडीएस में सीधा मुकाबला होने जा रहा है। 2013 में कांग्रेस का 45.8% सीट शेयर था जबकि जेडीएस का 42.4% था। वहीं, बीजेपी काफी पीछे थी, उसकी मौजूदगी 3.39% ही थी।

अगर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीएस येदियुरप्पा JD(S) के साथ डील करने में कामयाब हो जाते हैं तो वे कांग्रेस पार्टी को सत्ता से हटाने में कामयाब हो सकते हैं। वैसे भी त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में ही जेडीएस किंगमेकर की भूमिका में होगी। हालांकि पीएम मोदी काफी सतर्कता बरत रहे हैं क्योंकि एचडी कुमारस्वामी के साथ बीजेपी के साथ पिछला गठजोड़ अच्छा साबित नहीं हुआ था।

दूसरी तरफ, कांग्रेस-JD(S) के बीच गठबंधन से पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि ऐसी स्थिति सिद्धारमैया के लिए ठीक नहीं होगी क्योंकि देवगौड़ा ने मौजूदा मुख्यमंत्री पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ा है।

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