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गुजरात चुनाव: लकी सीट पर भी सियासी चक्रव्यूह में फंस गए विजय रुपाणी

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राजकोट

गुजरात विधानसभा चुनाव में इस बार मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की कड़ी सियासी अग्निपरीक्षा है। खासकर रुपाणी को उनके ही विधानसभा क्षेत्र राजकोट (पश्चिम) में कांग्रेसी उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरु से कड़ी चुनौती मिल रही है।

ऐसे में राजकोट (पश्चिम) के वोटरों का मूड जानने एनबीटी टीम वहां पहुंची। इस सीट से जुड़ा इतिहास बेहद दिलचस्प है। पिछले विधानसभा चुनाव में विजय रुपाणी इस सीट से विजयी हुए और बाद में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। नरेंद्र मोदी भी इस सीट से चुनाव लड़ने के बाद देश के प्रधानमंत्री बने। वजूभाई वाला यहां से कई बार चुनाव लड़े और बाद में कर्नाटक के राज्यपाल बने। गुजरात की राजनीति में यह सीट बेहद भाग्यशाली मानी जाती है। यह बीजेपी की परंपरागत सीट रही है। ऐसे में बीजेपी के लिए इस सीट को बचाना बड़ी चुनौती है।

रुपाणी बनाम राजगुरु
राजकोट (पश्चिम) विधानसभा सीट पर इस बार विजय रुपाणी को कांग्रेस के इंद्रनील राजगुरु से कड़ी चुनौती मिल रही है। राजकोट (पूर्व) विधानसभा सीट छोड़कर राजगुरु यहां रुपाणी को टक्कर देने के लिए मैदान में उतरे हैं। वह गुजरात चुनाव में सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। राजगुरु को यकीन है कि वह रुपाणी को हराने में कामयाब होंगे।

सौराष्ट्र बना केंद्र
सौराष्ट्र इलाके में राजकोट को राजनीति का केंद्र माना जाता है। सौराष्ट्र में पीएम नरेंद्र मोदी कई रैलियां कर चुके हैं। बीजेपी अपने कई स्टार प्रचारक यहां उतार चुकी है। वहीं राहुल गांधी भी इस इलाके का कई बार दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल का भी यहां बड़ा प्रभाव है। प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिलने के बाद भी वह यहां चुनावी सभा कर चुके हैं। यहां तक कि हार्दिक ने रुपाणी को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी।

कड़ा मुकाबला
पिछले कुछ दशकों से बीजेपी यह सीट नहीं हारी है, लेकिन इस बार बीजेपी के लिए राह आसान नहीं है। सत्ता विरोधी लहर यहां साफ दिख रही है। रुपाणी की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि वह राजकोट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में रुपाणी के लिए नाखुश वोटरों को अपने पाले में खींचना आसान काम नहीं है। जिन लोगों ने पिछली बार रुपाणी को वोट दिया, वे मानते हैं कि मुख्यमंत्री के लिए इस बार राह आसान नहीं है।

चुनाव प्रचार
एनबीटी से बातचीत में कई वोटरों ने कहा कि बीजेपी यह दावा करती है कि यहां बहुत विकास हुआ है। तो फिर क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के मंत्री इतनी ताकत गुजरात में क्यों लगा रहे हैं?एनबीटी को एक युवा कारोबारी ने बताया, ‘सरकार ने यहां कई योजनाओं का ऐलान किया, लेकिन इनमें से कोई भी पूरा नहीं हुआ। यहां तक कि मुद्रा योजना के बाद भी बैंक लोन देने को तैयार नहीं हैं। स्कूल फी रेग्युलेशन ऐक्ट भी अटका पड़ा है। कोई भी स्कूल कानून को नहीं मान रहा है और लोग गुस्से में हैं।’

किसान भी नाराज
राजकोट में बड़ी संख्या में वोटर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से कृषि से जुड़े हैं। फसल बीमा योजना को लेकर सरकार के कदम से वे लोग नाराज हैं। किसानों के लिए फसल बीमा योजना का लाभ उठाना आसान नहीं है।

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