Home खेल गोपीचंद ने बताया खेलों में कैसे छा सकता है भारत

गोपीचंद ने बताया खेलों में कैसे छा सकता है भारत

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नोएडा

नैशनल बैडमिंटन कोच और पूर्व ऑल इंग्लैंड चैंपियन पुलेला गोपीचंद के मार्गदर्शन में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है और उन्होंने देश को बैडमिंटन सुपरपावर बनाने में अकेले ही बड़ा योगदान दिया है। हैदराबाद मे उनकी अकैडमी ने देश के धुरंधर बैडमिंटन खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी है। उनके शिष्यों नें दुनिया के नंबर-3 किदाम्बी श्रीकांत, ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट महिला शटलर पी.वी. सिंधु और वर्ल्ड सिल्वर मेडलिस्ट साइना नेहवाल शामिल हैं।

श्रीकांत ने साल 2017 में 4 सुपरसीरीज खिताब जीते हैं जबकि सिंधु मौजूदा वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर-3 पर काबिज हैं। वहीं गोपीचंद के शिष्य एच.एस. प्रणॉय ने पिछले साल 3 बार के ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट और पूर्व नंबर-1 शटलर ली चोंग वेई और नंबर-4 चेन लोंग को शिकस्त दी थी। गोपीचंद ने पारुपल्ली कश्यप, बी. साई प्रणीत, गुरुसाई दत्त, एन. सिक्की रेड्डी, प्रणव चोपड़ा, बी. सुमित रेड्डी, रितुपर्णा दास और युवा सिरिल वर्मा को भी कोचिंग दी है।

कोच के रूप में इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद गोपीचंद को इस बात का मलाल है कि भारत में इस तरह का सिस्टम नहीं बना सके हैं जिससे खेलों को बढ़ावा मिले। सोमवार को टाइम्स ऑफ इंडिया के ऑफिस पहुंचे द्रोणाचार्य और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित गोपीचंद ने कहा, ‘मुझे लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में जो सबसे बड़ी बात रही, वह हमारे खिलाड़ियों की सफलता है। दुखद है कि पिछले कुछ सालों में हम इस तरह का सिस्टम बनाने के काबिल नहीं बन सके।’

44 वर्षीय गोपीचंद ने कहा, ‘हाइ परफॉर्मेंस, खिलाड़ियों को तैयार करना (ग्रूमिंग), भविष्य के बारे में सोच और खेलों के लिए एक ईकॉसिस्टम को बढ़ावा देने जैसा हम कुछ नहीं कर सके हैं। इस पर बहुत सारा काम किया जाना बाकी है। सबसे जरूरी यह है कि हमें इस दिशा में ज्यादा मच्योरिटी और समझ के साथ काम कर इस समस्या को सुलझाने की जरूरत है। एक देश के तौर पर हमें दीर्घकालिक परिणाम पाने के लिए इस पर सोचना पड़ेगा।’

उन्होंने कहा, ‘हमने देखा है कि बैडमिंटन के फील्ड में क्या कुछ हो सकता है और क्या संभव है, जब आप प्रयास करते हैं और एक लंबे समय के लिए काम करते हैं। हमने जो देखा है, वह बहुत शानदार है और लेकिन जो हम हासिल कर सकते हैं, वह अद्भुत है। यह तब ही संभव है, जब पूरा सिस्टम साथ मिलकर काम करे। जिस तरह हमने काम किया, मुझे लगता है कि मैं भाग्यशाली हूं। ईश्वर ने साथ दिया, नहीं तो इतने बेहतर परिणाम नहीं मिल पाते।’

गोपीचंद के मुताबिक, देश के बच्चों को ‘शारीरिक तौर पर शिक्षित’ होने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि खेल का पूरा सिस्टम इस पर निर्भर करता है कि हम पहले दिन, पहले साल, दूसरे साल या आगे भी, यह सोचकर नहीं खेले कि हम ओलिंपिक मेडलिस्ट बनना है। हम इसलिए खेले, क्योंकि हमें इस खेल से प्यार है जो हर किसी के खेलने का आधार है। यह जरूरी है, फन है, आनंद है और शारीरिक तौर पर शिक्षित होना है। यही कारण हैं कि जब लोग किसी खेल को खेलना शुरू करते हैं। इनमें से बेहतर करने वालों को तैयार करना चाहिए और उनको बेहतर कोचिंग देकर बड़े स्तर पर भेजना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि चैंपियनों को तैयार करने के दौरान हमें उन खिलाड़ियों का भी ध्यान रखना चाहिए जो सर्वश्रेष्ठ नहीं कर पाने के कारण पीछे रह गए। गोपीचंद ने कहा, ‘जो खिलाड़ी इस सिस्टम में नहीं आ पाते और अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाते, उन्हें भी हमें सुरक्षित बनाना चाहिए ताकि वे निरुत्साहित महसूस न करें।’ उन्होंने साथ ही कहा कि हर खिलाड़ी को इस तथ्य को समझने की जरूरत है कि जब आप खेल रहे हो तो हार और जीत उसका हिस्सा हैं। आपको सिक्के के दोनों पहलुओं को देखना होगा और जब दूसरे के लिए तैयार नहीं होगे तो पहले के बारे में नहीं सोच सकते। किसी भी व्यक्ति को खेलों को हार और जीत से ऊपर देखना चाहिए।

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