Home अंतरराष्ट्रीय चाबहार दांव के जरिए भारत ने पाकिस्तान को यूं किया चित

चाबहार दांव के जरिए भारत ने पाकिस्तान को यूं किया चित

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तेहरान

ईरान, अफगानिस्तान समेत पूरे मध्य एशिया, रूस और यूरोप से कारोबार करने के लिए भारत को नया रास्ता मिल गया है। अब तक पाकिस्तान इसके लिए रास्ता नहीं दे रहा था। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने रविवार को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट का उद्घाटन किया। अरब सागर में इस बंदरगाह से ईरान को फायदा तो होगा ही, भारत के भी हित जुड़े हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात जो इसकी महत्ता को बढ़ाती है, वह है इसकी लोकेशन।

ओमान की खाड़ी में चाबहार पोर्ट ने अपनी क्षमता तीन गुना तक बढ़ा ली है। इसके साथ ही पड़ोसी पाकिस्तान में बन रहे ग्वादर बंदरगाह के लिए भी यह चुनौती पेश करता है। गौर करने वाली बात यह है कि अब तक पाकिस्तान भारत को अफगानिस्तान जाने के लिए रास्ता नहीं दे रहा था पर अब भारत का क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा। 34 करोड़ डॉलर के इस प्रॉजेक्ट का निर्माण रेवलूशनरी गार्ड से जुड़ी कंपनी Khatam al-Anbia ने किया है। यह सरकार की निर्माण परियोजनाओं की ईरान की सबसे बड़ी कंट्रैक्टर कंपनी है।

इस प्रॉजेक्ट में कई सब-कंट्रैक्टर्स भी रहे हैं, जिसमें एक भारत की सरकारी कंपनी भी शामिल है। अब पोर्ट की वार्षिक क्षमता पहले के 25 लाख टन से बढ़कर 85 लाख टन हो गई है। ईरानी सरकारी टीवी ने कहा कि उद्घाटन समारोह में भारत, कतर, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दूसरे देशों के प्रतिनिधियों व अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पोर्ट में विस्तार के तहत 5 नए तटबंध बनाए गए हैं। इनमें से दो पर 1 लाख टन के सामान के साथ जहाज आ सकते हैं।
रविवार को चाबहार पोर्ट पर ईरान के राष्ट्रपति।

महत्वपूर्ण है कि चाबहार पोर्ट ने ईरान को हिन्द महासागर के और करीब ला दिया है। यह पाकिस्तान की सीमा से मात्र 80 किमी की दूरी पर है। ग्वादर पोर्ट को भी यह चुनौती देता है, जिसे चीनी निवेश के दम पर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बनाया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल भविष्य में चीन अपने नौसैनिक जहाजों के लिए कर सकता है। ऐसे में चाबहार पर भारत की मौजूदगी काफी मायने रखती है।

हालांकि रूहानी ने अपने संबोधन में किसी प्रकार की प्रतिद्वंद्विता को जाहिर नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों के बीच यह पोर्ट ज्यादा ‘एंगेजमेंट और यूनिटी’ लाने का काम करेगा। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमें सकारात्मक प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। हम क्षेत्र के दूसरे बंदरगाहों का भी स्वागत करते हैं। हम ग्वादर पोर्ट के विकास का भी स्वागत करते हैं।’

पीएम रूहानी ने कहा कि ईरान इस पोर्ट को देश के रेल और रोड नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे समंदर से दूर मध्य एशियाई देशों तक आपूर्ति हो सके और रूस के जरिए पूर्वी एवं उत्तरी यूरोप के लिए मार्ग खुल सकें।

भारत के लिए चाबहार में निवेश काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पोर्ट की मदद से मध्य एशिया के जो देश जमीन से घिरे हैं वहां तक पहुंचने के लिए कारोबार का नया रास्ता मिल जाएगा। फिलहाल पाकिस्तान इस मार्ग में बाधा बन कर रहा है, पर चाबहार से होकर भारत की यह मुश्किल आसान होने वाली है। पिछले साल भारत ने चाबहार पोर्ट और उससे जुड़े रोड और रेल मार्ग के विकास के लिए 50 करोड़ डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी।

अक्टूबर में नई दिल्ली ने ईरानी पोर्ट के जरिए अफगानिस्तान को गेहूं की पहली खेप भेजी थी। भारत अफगानिस्तान को कुल 1.30 लाख टन गेहूं का निर्यात करने वाला है, यह खेप इसी का हिस्सा थी। चाबहार में एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है और शहर में ईरानी नौसेना और वायु सेना के बेस भी हैं, जिससे इसकी महत्ता बढ़ जाती है।

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