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चुनावी मौसम में डॉनल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को दिया सबसे बड़ा सिरदर्द

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नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों कर्नाटक में 12 मई को होनेवाले चुनाव के प्रचार में व्यस्त हैं। उनकी सरकार को करीब आधा दर्जन राज्यों में अभी चुनाव का सामना करना है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में पीएम मोदी के ‘स्वाभाविक सहयोगी’ अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सबसे बड़ा सिरदर्द दे दिया है। दरअसल, ट्रंप ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ हुई परमाणु संधि से अमेरिका के बाहर होने की घोषणा कर दी।

कर्नाटक चुनाव से पहले मोदी सरकार के लिए टेंशन की बात यह है कि तेल की कीमतें पहले से ही साढ़े तीन साल में सबसे ज्यादा हैं। ऐसे में सरकार को अपने नियंत्रण वाली तेल मार्केटिंग कंपनियों को तेल की कीमतें बढ़ाने से रोक दिया। हालांकि इससे पहले सरकार ने तेल की कीमतें तय करने का अधिकार कंपनियों को दे दिया था।

इंडियन ऑइल की वेबसाइट पर उपलब्ध डेट से साफ है कि ऑइल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने 24 अप्रैल से तेल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। हालांकि इस दौरान क्रूड ऑइल की कीमतें करीब साढ़े तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं। सरकार के लिए टेंशन का कारण विधानसभा चुनाव ही नहीं हैं बल्कि तेल के दाम बढ़े तो महंगाई भी बढ़ जाएगी। ग्राहकों की मांग घटने से सरकार की वित्तीय गणित भी अस्थिर भी हो सकता है।

तेल की कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि होने से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) 15 अरब डॉलर या GDP का 0.6 फीसदी बढ़ जाएगा। इससे वित्तीय घाटा GDP का 0.1 फीसदी बढ़ जाएगा। ट्रंप के फैसले के बाद जुलाई के लिए ब्रेंट क्रूड 2.5 फीसदी ज्यादा करीब 67.73 डॉलर प्रति बैरल ट्रेड कर रहा था, जो नवंबर 2014 के बाद सबसे ज्यादा है।

CARE रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि अभी ऐसा नहीं लग रहा है कि कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर के आंकड़े से नीचे जाएंगी। हालांकि केंद्रीय बजट या RBI की नीतियों में तेल की कीमतें के 65-70 डॉलर के बीच रहने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन नया सामान्य स्तर 70-75 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है।

ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने भारतीय समयानुसार मंगलवार आधी रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘हम ईरान के परमाणु बम को नहीं रोक सकते। ईरान समझौता मूल रूप से दोषपूर्ण है इसलिए, मैं ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा कर रहा हूं।’ इसके कुछ समय बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ ताजा प्रतिबंधों वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और उन्होंने साथ ही आगाह किया कि जो भी ईरान की मदद करेगा उन्हें भी प्रतिबंध झेलना पड़ेगा।

तेल का खेल
तेल खपत के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत जिन देशों से तेल खरीदता है, उनमें ईरान तीसरे नंबर पर और सऊदी अरब, इराक पहले और दूसरे नंबर पर आते हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। तेल की कीमत से परेशान भारत के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। आपको बता दें कि अमेरिका की इस कार्रवाई से पहले ही वर्ल्ड बैंक ने तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था।

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