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जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस : विशेषज्ञों ने बताया अभूतपूर्व और चौंकाने वाला

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे सीनियर जजों द्वारा शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को कानून के विशेषज्ञों ने ‘अभूतपूर्व’ बताया है। कुछ विशेषज्ञों ने इसे चौंकाने वाला बताया है तो कुछ का कहना है कि इस तरह के कदम के पीछे कुछ बड़े और बाध्यकारी कारण रहे होंगे। कानून के कुछ जानकारों ने आज के घटनाक्रम को न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाला बताया है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. एस. सोढ़ी, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मुकुल मुद्गल, सीनियर ऐडवोकेट के.टी.एस. तुलसी, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और अश्विनी कुमार ने जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस की अभूतपूर्व घटना पर चिंता जाहिर की है। दूसरी तरफ सीनियर ऐडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने इस कदम का स्वागत करते हुए चारों जजों को बधाई दी है।

जस्टिस सोढ़ी ने मीडिया के जरिए बात रखने के जजों के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कैसे कर सकते हैं। जस्टिस सोढ़ी ने कहा, ‘मैं इसके नतीजों को लेकर बहुत ही दुखी हूं…यह निराश करने वाला है। आप प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सुप्रीम कोर्ट का कामकाज कैसे चला सकते हैं। क्या आप जनमतसंग्रह करने जा रहे हैं और लोगों से पूछ रहे हैं कि क्या सही है और क्या गलत।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह अभूतपूर्व कदम है। 4 जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से न्यायिक व्यवस्था को बहुत बड़ा आघात पहुंचा है। इस कदम से न्यायपालिका को जो नुकसान पहुंचा है, मैं नहीं समझता कि उसकी आसानी से भरपाई हो सकती है।’

पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मुद्गल ने जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि 4 सबसे वरिष्ठ जज उन मुद्दों को सामने लाना चाहते थे जिनके बारे में वे समझते हैं कि उन्हें पब्लिक नोटिस में लाया जाना जरूरी था। जस्टिस मुद्गल ने कहा कि कोई न कोई बड़ी वजह जरूर रही होगी और ‘वे ऐसे जज नहीं हैं जिन्हें पब्लिसिटी की भूख हो और वे गैरजरूरी पब्लिसिटी के पीछे भागने वाले लोग नहीं हैं।’

बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि जब जजों को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी तो उसमें कमी ढूढ़ने के बजाय उन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री को पहल करनी चाहिए और उन्हें चीफ जस्टिस व चारों जजों से संपर्क कर बातचीत के जरिए पूरे मामले को हल करना चाहिए।

जजों के कदम का स्वागत करते हुए सीनियर ऐडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने चारों जजों को उनके ‘साहसिक कदम’ के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘जैसे कि उन्होंने कहा कि वे इतिहास का कर्ज चुका रहे हैं, खासकर वे देश को इससे अवगत कराना चाहते हैं कि कहीं कुछ बहुत गलत हो रहा है और उसे ठीक करने की जरूरत है।’

ऐडवोकेट प्रशांत भूषण ने भी आज के घटनाक्रम को अभूतपूर्व बताया है। उन्होंने कहा कि जजों ने मजबूर करने वाले हालात के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जैसा आखिरी विकल्प आजमाया है। भूषण ने कहा, ‘ये चारों जज बहुत ही जिम्मेदार हैं। अगर वे यह कर रहे हैं तो हालात निश्चित तौर पर नियंत्रण से बाहर हो चुके होंगे। उन्होंने कहा है कि सीजेआई सभी मामलों को आवंटित करने की अपनी प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।’

वरिष्ठ वकील के.टी.एस. तुलसी ने जजों के कदम को चौंकाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि स्थितियां ऐसी बनेंगी कि 4 सबसे वरिष्ठ जजों को इस तरह का कदम उठाना पड़ेगा। तुलसी ने कहा, ‘मुझे पक्का यकीन है कि वे (चारों जज) बाकी सभी तरीकों को आजमाकर थक चुके होंगे। जब वे बोल रहें थे तो उनके चेहरों पर दर्द देखा जा सकता था। सारा मामला न्याय तंत्र के सम्मान से जुड़ा है। सवाल प्राकृतिक न्याय का है। ‘

पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी आज के घटनाक्रम को चिंताजनक बताया है। पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने इसे ‘भारतीय लोकतंत्र के लिए दुखभरा दिन’ करार दिया है। बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे सीनियर जजों- जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीजेआई दीपक मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इन जजों ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसा करते हुए खुशी नहीं हो रही है जबकि उन्हें मजबूर होकर ऐसा करना पड़ रहा है।

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