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जन्म दिन मनाने की लगी होड़

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भोपाल

जैसे-जैसे विधान सभा चुनाव का समय करीब आता जा रहा है वैसे-वैसे गोविन्दपुरा विधान सभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। जनता से जुडऩे या पार्टी के कार्यकर्ताओं को खुश करने का कोई भी रास्ता हो नेता खोजनें में लगे है। क्षेत्र में चर्चा इस बात है कि पांच साल तक जो नेता इनका जन्म दिन कभी सार्वजनिक रूप से नहीं मनाते थे वह सब खुलकर होने लगा है। यूं तो हमेशा ही इस सीट पर दावेदारी वर्तमान विधायक की रही है लेकिन इस बार कई गुट बनकर खड़े हो गये है इसके चलते जन्म दिन की बधाई की होड़ सी लग गई है। बरखेड़ा स्थित विधायक कार्यालय पूर्व महापौर ने एक ही दिन में सात-सात लोगों के जन्म दिन मना डाले।

तो महापौर समर्थक लोगों ने पिपलानी स्थित हायर सेकेन्ड्री चौराहे को जन्म दिन मनाने का अड्डा बना डाला। यहां एक माह में 20 दिन जन्म दिन का दौर ही चलता है। यूं इस विधान सभा क्षेत्र से दावेदारी की दौड़ में वर्तमान विधायक, महापौर, पूर्व महापौर, एक निगम अध्यक्ष तो एक मंत्री भी शामिल हो गये है। भाजपा की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं को खुश करने और अपने गुट में शामिल करने के लिए हर तरह के प्रलोभन के साथ जन्म दिन मनाने की एक नई परम्परा की शुरूआत आने वाले विधान सभा चुनाव के नजरिये से देखी जा रही है।

सीनियर डीजीएम, एजीएम की फजीहत

भेल में महाप्रबंधक के प्रमोशन की लिस्ट देर से निकालने के चक्क र में सीनियर डीजीएम और एजीएम की लिस्ट भी उलझ कर रह गई है। इस वर्ग के अधिकारी बड़ी ही बैचेनी से लिस्ट आने का इंतजार कर रहे है तो कुछ लिस्ट में देरी होने से अपना नाम जुड़वाने में पूरी ताकत झोंके हुए है। चर्चा है कि कार्पोरेट प्रबंधन प्रमोशन का कोटा कम करने का मन भी बना चुका है ऐसे में प्रमोशन लिस्ट में से कब किसका नाम कट जाये कहा नहीं जा सकता। वैसे भी चेयरमेन साहब जापान दौरे पर हंै। उनके आने के बाद कम से कम डीजीएम से सीनियर डीजीएम की लिस्ट तो निकल ही जायेगी। फिर भी सीनियर डीजीएम से एजीएम और एजीएम से जीएम की लिस्ट आने में देरी की चर्चा सुनी जा रही है। इसको लेकर इस पद के दावेदारों में काफी बैचेनी देखी जा रही है उनकी नींद उड़ी हुई है। इधर स्वीचगियर विभाग के जीएम भी रिटायर होने वाले है और एजीएम पीके मिश्रा प्रमोशन के बाद हरिद्वार भी भेजे जा सकते है। ऐसे में मुखिया को इन विभागों के दायित्व को सौंपना है। ऐसे में जीएम की प्रमोशन लिस्ट का इंतजार करना लाजमी हो गया है। अब देखना है कि कार्पोरेट प्रबंधन कब तक प्रमोशन लिस्ट को लटकाए रखेगी।

भेल में जीएसटी का बुखार

सरकार ने पूरे देश में जीएसटी लागू कर दी है लेकिन इसका बुखार भेल कारखाने में कुछ ज्यादा ही चढ़ा हुआ है। फायनेंस विभाग ने सभी अधिकारी-कर्मचारी व्यस्त नजर आ रहे है बिलों की भरमार इतनी ज्यादा हो गई है कि उसे देख पाना मुश्किल हो गया है। चर्चा है कि सप्लायर और कॉन्ट्रेक्टरों से बिल लेना बंद कर दिया है। इससे उनमें हड़कंप मचा हुआ है। उनकी समझ मेें नहीं आ रहा है कि वह करे तो क्या करे। इस चक्कर में कब किसकी ठेकेदारी पर गाज गिरेगी यह समझ से बाहर हो गया है। विभाग अधिकारी इतने व्यस्त है कि वह ठेकेदार और सप्लायरों को यह नहीं समझा पा रहे है कि आखिर जीएसटी के लिए उन्हें क्या करना है। इधर सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए लकी भेल का जम्बूरी मैदान राजनीति की भेंट चढ़ चुका है यहां तक कि केन्द्र सरकार द्वारा करोड़ों की लागत से लगने वाला सोलर प्लांट पर भी संकट के बादल साफ दिखाई दे रहे है। चर्चा है कि राज्य सरकार का प्रिय स्थल जम्बूरी मैदान पर सोलर प्लांट लगाने के लिए भेल प्रबंधन ने भी हार सी मान ली है। कहा जा रहा है कि इसके लिए नई जगह की तलाश शुरू हो गई है। राजनीति हठ के चलते प्रदेश सरकार के अड़ंगे केन्द्र सरकार तक पहुंच गये है।

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