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जेल में तड़प रहा था उन्‍नाव गैंगरेप के पीड़िता का पिता, 5 दिन तक पत्र भेजते रहे डॉक्‍टर्स

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उन्‍नाव

यूपी के उन्‍नाव में गैंगरेप के मामले में योगी आदित्‍यनाथ सरकार सवालों के घेरे में है। अब इस मामले में एक नया खुलासा हुआ है। हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता के पिता की न्‍यायिक हिरासत में मौत हो गई जबकि जेल अधिकारी और डॉक्‍टर पांच दिनों तक केवल एक-दूसरे को पत्र भेजते रहे। इस दौरान पीड़िता के गंभीर रूप से घायल पिता का इलाज नहीं किया गया। अगर उन्‍हें सही समय इलाज मिल गया होता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।

रिपोर्ट के मुताबिक गैंगरेप की पीड़िता के पिता को 4 अप्रैल की शाम को जिला अस्‍पताल से पहली बार उन्‍नाव जेल भेजा गया था जबकि वह उस समय गंभीर रूप से घायल थे। जेल के एमबीबीएस डॉक्‍टर ने 5 अप्रैल को पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखा था और कहा कि पीड़िता के पिता को तत्‍काल चिकित्‍सा की जरूरत है। उन्‍होंने यह भी कहा कि जेल में इस तरह की कोई सुविधा नहीं है जिससे कि ठीक ढंग से इलाज किया जा सके।

इकनॉमिक टाइम्‍स के हाथ लगी एसआईटी की विस्‍तृत रिपोर्ट के मुताबिक इस पत्र के बाद भी पीड़िता के घायल पिता को हॉस्पिटल में नहीं भेजा गया। इसके अलावा 6 अप्रैल को हॉस्पिटल के दो डॉक्‍टरों ने उनकी जांच की और बे‍हतर इलाज की सिफारिश की। सात अप्रैल को पीड़िता के पिता को दो पुलिसकर्मी हॉस्पिटल ले गए।

हॉस्पिटल में उनका एक्‍स रे और अल्‍ट्रासाउंड किया गया लेकिन एक रिपोर्ट जारी कर दी गई कि वह स्‍वस्‍थ हैं। इसके बाद उसी रात उन्‍हें वापस भेज दिया गया। जेल में ही 9 अप्रैल को पीड़िता के पिता की तबीयत और ज्‍यादा खराब हो गई। उनकी आंत में संक्रमण फैल गया। उन्‍हें हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई।

यूपी के प्रधान सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने भी स्‍वीकार किया है कि पीड़िता के पिता का ठीक ढंग से इलाज नहीं किया गया। हॉस्पिटल ने उन्‍हें 7 अप्रैल को जेल भेज दिया जबकि जेल के अधिकारियों ने पीड़िता के पिता के शरीर में गंभीर आंतरिक चोट बताई थी। कुमार ने कहा, ‘चिकित्‍सा अधिकारियों ने लापरवाही की और आपातकालीन चिकित्‍सा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा तीन अन्‍य डॉक्‍टरों के खिलाफ ऐक्‍शन लिया जाएगा। इन डॉक्‍टरों ने भी पीड़िता के पिता की जांच की थी।’

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