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टारगेट में डब्ल्यूटीएम बना है नम्बर-1

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भोपाल

पिछले आठ माह का टारगेट का रिकार्ड उठाकर देखें तो हाइड्रो गु्रप के वाटर टरबाईन सबसे आगे दिखाई दे रहा है वहीं ट्रांसफार्मर दूसरे नम्बर पर है और ट्रेक् शन भी तीन नम्बर पर पहुंच गया है इसको लेकर कर्मचारी-अधिकारी चर्चा करते नहीं थकते। इसी तरह सभी विभाग मेहनत कर लें तो शायद टारगेट तक पहुंचा जा सकता है। हाईड्रो गु्रप के मुखिया को भेल के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है इधर ट्रांसफार्मर के मुखिया के साथ भेल कार्पोरेट ने ईडीएन बंग्लुरू के पूर्व ईडी आरके तिवारी को इस विभाग का कंसलटेंट बनाना भी कम तारीफ के काबिल नहीं है। चर्चा है कि चेयरमेन की दूरदर्शिता इस वित्तीय वर्ष में ट्रांसफार्मर को एक बार फिर आगे बढ़ाने के रूप में देख रहे है इस यूनिट के अफसर। श्री तिवारी इस विभाग के स्पेशलिस्ट माने जाते हैं। रही बात ट्रेक् शन मोटर की तो यहां के प्रमुख और उनकी टीम किसी से कम दिखाई नहीं दे रही है। इस समय सबसे पीछे थर्मल ग्रुप दिखाई दे रहा है। यहां के नये मुखिया वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर कितना दम मारते हैं यह भी सामने आ जायेगा। यूं तो यहां ऑर्डरों की कमी खुद मुखिया को खल रही है। 31 दिसंबर तक तीन माह का निर्धारित टारगेट 1000 करोड़ हो पायेगा या नहीं इसको लेकर भी चर्चाएं जारी।

थ्रिफ्ट के पूर्व अध्यक्ष की याद ताजा

अगले माह बीएचईई थ्रिफ्ट एंड के्रडिट को-आपरेटिव सोसायटी एक साल कार्यकाल पूरा करने जा रही है। दस साल तक एक पूर्व अध्यक्ष ने पूरी दमदारी से इस संस्था को चलाया और दादागिरी का आलम यह था कि उन्होंने कुछ कर्मचारी ही नहीं बल्कि संस्था के कुछ डायरेक्टरों को भी सदस्यता खत्म कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था। बात जो भी हो लेकिन हजारों कर्मचारियों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि वर्तमान में सत्ताधारी दल भी पूर्व अध्यक्ष के पैटर्न पर चल पड़ा है। प्रजातंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर वार करते हुए भेल कर्मचारी व संस्था के सदस्य चेतन साहू, छोटेलाल कोरी, राजेश पाटकर,विशाल वाणी और रामनारायण को नोटिस तक दे डाला। यही नहीं उनकी थ्रिफ्ट मेम्बरशिप में भी कटौती बंद कर दी। इसको लेकर यह कर्मचारी परेशान हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। अब लोग कहने लगे हैं कि एक बार फिर संस्था पूर्व अध्यक्ष की स्टाईल में चलने लगी है। खबर तो यह भी है कि संस्था नये साल के गिफ्ट चार पहिया वाहनों में घूमने वाले सदस्यों को साइकिल देने की तैयारी कर रही है जो मुसीबत का सबब बन सकती है।

छोटे साहब बैठेंगे एजीएम के कमरे में

साहब मेहरबान तो खुदा पहलवान वाली कहावत कारखाने के फीडर्स ग्रुप के अन्तर्गत टीजीएम विभाग की चर्चाओं में है। ग्रुप के मुखिया ने अपने चहेते अफसर को खुश करने के लिए आगे रहकर एक अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी का कमरा खुलवाकर अपने चहेते को बिठा दिया। इसकी परवाह उन्हें नहीं है कि लोग क्या बोलेंगे। चर्चा है कि कुछ मामलों मेें सीवीओ की इन्क्वायरी झेल रहे एक सीनियर डीजीएम को खाली बैठे एजीएम के रहते एक तो विभाग का एचओडी बनाया दूसरा आनन-फानन में उन्हें एजीएम का बड़ा कमरा भी दे डाला। इसको देख विभाग के कर्मचारी व अन्य अधिकारी आश्चर्य चकित रह गये। अब वह कारखाने से बाहर आकर बताते है कि साहब मेहरबान तो खुदा पहलवान की कहावत को कौन गलत कर सकता है। मजेदार बात तो यह भी है कि कार्पोरेट प्रबंधन इन बातों को नजर अंदाज कर खुद चर्चा का विषय बना देता है।

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