Home कारपोरेट डिफॉल्टर्स की ‘नींद तोड़ेगी’ RBI की अधिसूचना

डिफॉल्टर्स की ‘नींद तोड़ेगी’ RBI की अधिसूचना

0 21 views
Rate this post

मुंबई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फंसे कर्ज के निपटान की मौजूदा प्रणाली में बड़ा संशोधन किया है। इन नियमों को दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के अनुरूप बनाया गया है। इससे बैंकिंग प्रणाली में फंसे कर्ज की समस्या के तुरंत समाधान में मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक ने संशोधित रुपरेखा में दबाव वाली परिसंपत्तियों की ‘जल्द पहचान’ करने, निपटान योजना का समयबद्ध पालन और उस अवधि में बैंकों के विफल रहने पर उन पर जुर्माना लगाने के लिए विशेष नियम बनाए हैं।

रिजर्व बैंक के इस कदम पर वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने कहा कि केन्द्रीय बैंक की सोमवार रात जारी यह अधिसूचना ऋण चुकाने में असफल कर्जदारों को ‘नींद से जगाने’ वाली है। उन्होंने कहा सरकार एक बार में ही फंसे कर्ज का निपटान करने के लिए प्रतिबद्ध है, वह इसे लटकाना नहीं चाहती है। ऐसे कर्ज के निपटान के लिये नयी व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी है। रिजर्व बैंक की अधिसूचना में कहा गया है कि इस तरह के सभी खातों का समाधान अब नयी व्यवस्था के तहत ही किया जाएगा।

रिजर्व बैंक की नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, संशोधित रुपरेखा के साथ ही उसने फंसे कर्ज से निपटने की मौजूदा व्यवस्था को वापस ले लिया है। इनमें कंपनियों की ऋण पुनर्गठन योजना, रणनीतिक ऋण पुनर्गठन योजना और दबाव वाली संपत्ति को टिकाऊ स्वरूप देने की योजनायें शामिल हैं, जिन्हें वापस ले लिया गया है। दबाव वाली परिसंपत्तियों के निपटान के लिए बैंकों के संयुक्त मंच (जॉइंट लेंडर्स फोरम-जेएलएफ) की सांस्थानिक व्यवस्था को भी खत्म कर दिया गया है।

इसमें वे खाते भी शामिल हैं, जहां पुरानी व्यवस्था के तहत प्रक्रिया तो शुरु हो गई है, लेकिन अभी तक उनमें निपटान का अनुपालन शुरु नहीं हुआ है। राजीव कुमार ने साफ किया कि रिजर्व बैंक के फैसले का बैंकों के प्रावधान करने के नियमों पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं होगा। सरकार ने बैंकों की एनपीए की समस्या से निपटने के पिछले साल रिजर्व बैंक को ज्यादा अधिकार दिए थे।

दोस्तों के साथ शेयर करे.....