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कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु में PM का जोरदार विरोध, लगे ‘मोदी गो बैक’ के पोस्टर

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नई दिल्ली/चेन्नै

तमिलनाडु में कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड बनाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राजनीतिक, सामाजिक और छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया है. गुरुवार को तमिलनाडु पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे का विपक्षी पार्टियों ने काले झंडे दिखाकर विरोध किया.

स्वागत के साथ उड़े मोदी गो बैक… के नारे वाले गुब्बारे
नई दिल्ली से एक विशेष विमान से चेन्नई पहुंचे मोदी का हवाईअड्डे पर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, पोन राधाकृष्षण, राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित, मुख्यमंत्री ई.पलनीस्वामी, उपमुख्यमंत्री ओ.पन्नीरसेल्वम और मुख्य सचिव गिरिजा वैद्यनाथन ने स्वागत किया. चेन्नई में लोगों ने नरेंद्र मोदी के विरोध में काले गुब्बारे उड़ाए, जिस पर मोदी गो बैक के नारे लिखे हुए थे.

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हो सकता है कि मोदी एयरपोर्ट से सीधे डिफेंस एक्सपो चले जाएं तो ये विरोध प्रदर्शन उन्हें नहीं दिखेगा. लेकिन वे ये काले गुब्बारे देख सकते हैं, जो चीख-चीख कर तमिल जनता की मांग को गुंजायमान बना रहे हैं.

करुणानिधि ने विरोध के समर्थन में पहनी काले रंग की पोशाक
इस बीच द्रमुक सहित विपक्षी पार्टियों ने काले झंडे दिखाकर मोदी की इस यात्रा का विरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) और कावेरी जल नियामक समिति (सीडब्ल्यूआरसी) गठित करने में नाकाम रहने पर केंद्र सरकार की निंदा करने के लिए ऐसा किया. द्रमुक नेता एम. करुणानिधि ने विरोध के समर्थन में काले रंग की पोशाक पहनी और जनता के सामने आए. उनकी एक फोटो मीडिया में जारी की गई है.

वाइको बोले- कावेरी बोर्ड न बनाना साजिश
तमिलनाडु के जाने पहचाने चेहरों में से एक वाइको ने भी गुरुवार को मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए राजभवन मार्च किया. ये लोग काले रंग के कपड़े पहने हुए हाथों में काले झंडे लिए थे. साथ में काले गुब्बारे भी हवा में उड़ाए तो साइदापेट में रोड जाम किया.वाइको ने कहा कि कावेरी बोर्ड का गठन नहीं करना एक साजिश है. दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कबूतरों को काले रिबन बांध कर उन्हें उड़ाया और अपना विरोध जताया.

मोदी के विरोध में IIT चेन्नई के छात्रों ने की आवाज बुलंद
इससे पहले कैंसर संस्थान से सटे आईआईटी-मद्रास में मोदी के लिए एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया. जहां आईआईटी के छात्रों ने नरेंद्र मोदी का जोरदार विरोध किया. हालांकि मोदी के इस दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं.

आईआईटी चेन्नई के मैकेनिकल साइंस ब्लॉक में आईआईटी छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया. छात्रों के हाथों में मोदी के खिलाफ नारे लिखे हुए प्लेकार्ड थे. हालांकि आईआईटी कैंपस पहुंचने के साथ ही मोदी ने हेलिकॉप्टर के जरिए उड़ान भरी और सीधे डिफेंस एक्सपो पहुंच गए.इस दौरान कैंपस के भीतर छात्रों का प्रदर्शन चलता रहा.

29 मार्च को खत्म हो गई सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित छह सप्ताह की समय सीमा 29 मार्च को समाप्त हो गई. केंद्र ने कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आखिरी मिनट में अदालत में स्पष्टीकरण याचिका दायर की थी और आदेश को लागू करने के लिए तीन महीने का समय मांगा था. इस बीच कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया समाप्त हो जाती.

विरोध में उतरे एम. के. स्टालिन सहित कई राजनेता
द्रमुक नेता एम.के.स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नागापट्टिनम जिले के सिरकाझी में काली कमीजें पहनकर मोदी की यात्रा का विरोध किया. द्रमुक ने लोगों से अपने घरों पर काले झंडे लगाने और मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील की.

टी. वेलमुरुगन के नेतृत्व में तमिझागा वाझवुरिमई काची (टीवीके) और पी.नेडुमारन के नेतृत्व में तमिल राष्ट्रवादी आंदोलन ने चेन्नई में अलान्दूर मेट्रो स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया. हवाईअड्डे के पास विधायकों तमिमम अंसारी और तानियारसी के साथ तिरिसूलम में एसडीपीआई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया.

इसी तरह लोकप्रिय फिल्मकारों भारतीराजा, अमीर, गौथमम और तांगरबचन द्वारा गठित तमिलागा कलाई इलाकिया पनपट्टू मैयम के सदस्यों को हवाईअड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया. ये मोदी के दौरे के विरोध में काले झंडे दिखा रहे थे.

प्रदर्शनकारियों की क्या है मांग
कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) और कावेरी जल नियामक समिति (सीडब्ल्यूआरसी) अभी तक गठन नहीं हुआ। इन बातों को लेकर तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन जारी है। बता दें कि तमिलनाडु ने केंद्र के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की थी और कहा था कि वह कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड की स्थापना करने में विफल रही है। सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा कि 3 मई को तमिलनाडु की उस याचिका पर भी सुनवाई होगी। इससे पहले 16 फरवरी को सुनाए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कावेरी जल विवाद पर 6 हफ्तों के अंदर योजना लागू करने के लिए कहा था। इसे लेकर केंद्र ने 6 हफ्तों का समय मांगा था, लेकिन समयसीमा निकल जाने पर केंद्र ने इसे 3 महीने और बढ़ाए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

क्या है कावेरी जल विवाद?
कावेरी नदी के बेसिन में कर्नाटक का 32 हजार वर्ग किलोमीटर और तमिलनाडु का 44 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका आता है। दोनों ही राज्यों का कहना है कि उन्हें सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। इसे लेकर दशकों से विवाद चल रहा है। विवाद के निपटारे के लिए जून 1990 में केंद्र सरकार ने कावेरी ट्राइब्यूनल बनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी नदी के जल के बंटवारे में तमिलनाडु के हिस्से का पानी घटा दिया और कर्नाटक का हिस्सा बढ़ा दिया था।

SC ने केंद्र को लगाई थी फटका
सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर 9 अप्रैल को सुनवाई की थी और इस दौरान जल बंटवारे के फैसले को लागू करने के लिए योजना तैयार न कर पाने के लिए केंद्र को फटकार लगाई थी। अब कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह 3 मई तक इस फैसले को लागू करने के लिए योजना तैयार करे।

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