Home भेल न्यूज़ तीन दिन में अर्नलीव का भुगतान नहीं किया तो होगा उग्र आंदोलन

तीन दिन में अर्नलीव का भुगतान नहीं किया तो होगा उग्र आंदोलन

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हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद भेल के फाउन्ड्री गेट पर आम सभा

भोपाल

भेल की मुख्य दो प्रतिनिधि यूनियन हेम्टू इंटक एवं ऐबू यूनियन ने प्रबंधन के आदेश के विरूद्ध माननीय हाइकोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की जिस पर माननीय हाइकोर्ट जबलपुर ने 8 दिसम्बर 2017 को प्रबंधन के आदेश के विरूद्ध स्टे आर्डर दिया गया। इसकों लेकर शनिवार को भेल के फाउन्ड्री गेट पर यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सुपरवाइजर ऑफिसर्स काउन्सिल के आव्हान् पर कर्मचारियों की एक विशाल सभा आयोजित की।

सभा को संबोंधित करते हुए हेम्टू इंटक अध्यक्ष आरडी त्रिपाठी और ऑल इंडिया भेल एम्प्लाइज यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामनरायण गिरी ने कहा कि तीन दिनों के अन्दर 24 नवम्बर 2017 के पहले की स्थिति के अनुसार अर्नलीव का भुगतान नहीं किया गया तो कर्मचारी सीधी कार्यवाही के लिए बाध्य होगें। सभा को इंटक से राजेश शुक्ला, व्ही एस राठौर, एक्ज्यूकेटिव यूनियन से आर.एल. भावर, सूपरवाइजर एसोसिएशन से अशोक तिवारी, जी.एस. सोलंकी, संजीव गोस्वामी एटक यूनियन रामहर्ष पटेल, सीटू यूनियन के लोकेन्द्र सिंह शेखावत, एससीएसटी यूनियन के भीमसिंह धु्रर्वे ने सभा को सम्बोधित किया।

मामला यह है
अभी तक अर्नलीव एवं मेडीकल लीव जो कर्मचारी अर्जित करते थे उसका उपयोग न कर अर्नलीव एवं मेडीकल लीव का नकदीकरण प्रति कर्मचारी को उसके मिलने वाले मासिक वेतन के आधार पर भुगतान किया जाता था। 24 नवम्बर 2017 को कार्पोरेट भेल प्रबंधन ने यह आदेश निकाला कि तत्काल प्रभाव से भेल कर्मी अर्नलीव एवं मेडीकल लीव के नकदीकरण का भुगतान केवल सेवानिवृत्त के समय अधिकतम 300 दिनों तक का ही कर सकते हैं। अभी तक प्रत्येक कर्मचारी लगभग 1200 से 1400 दिन तक की अर्नलीव एवं मेडीकल लीव बचाता था। प्रबंधन के इस आदेश से वर्तमान समय में प्रत्येक कर्मचारी को दस लाख से तीस लाख तक की क्षति हुई है।

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