Home फीचर …तो इसलिए सेंगर पर हाथ डालने से बच रही थी योगी सरकार?

…तो इसलिए सेंगर पर हाथ डालने से बच रही थी योगी सरकार?

0 104 views
Rate this post

लखनऊ

उन्नाव गैंगरेप मामले में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को शुक्रवार सुबह सीबीआई ने हिरासत में ले लिया और उनसे लेकर पूछताछ की जा रही है। इससे पहले गुरुवार को यूपी पुलिस ने विधायक के खिलाफ रेप मामले में एफआईआर दर्ज कर ली थी, लेकिन गिरफ्तारी न होने पर पुलिस बार-बार पर्याप्त सबूत न होने की बात कह रही थी।

इसके बाद गुरुवार रात गैंगरेप मामले की फाइल यूपी पुलिस से सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई सीबीआई ही करेगी। बताया जा रहा है कि सीबीआई को मामला सौंपने की सलाह बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दी गई थी। इसके अनुसार ही गुरुवार सुबह सरकार ने सेंगर के खिलाफ केस दर्ज कराकर गेंद सीबीआई के पाले में फेंक दी थी।

विधान परिषद चुनाव से पहले कार्रवाई नहीं चाहती सरकार
इसी के साथ सरकार पर आरोपी विधायक को बचाने के भी आरोप लगे। ऐसा माना जा रहा है कि इसके पीछे वजह इस महीने के आखिर में होने वाले विधान परिषद चुनाव है। जहां बीजेपी के कई ठाकुर जाति के विधायक सेंगर के समर्थन में खड़े हो रहे हैं, वहीं योगी सरकार विधान परिषद चुनाव से पहले सेंगर पर कार्रवाई से बच रही है। बता दें कि विधान परिषद चुनाव में भी बीजेपी राज्यसभा की तरह ज्यादा सीटें जीतना चाहती हैं।

इस बार नौ एमएलसी के चुनाव के लिए बीजेपी को विधायकों के वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में अपने विधायकों के नाराज न होने का बीजेपी खास ध्यान दे रही है। मामले में एक दूसरा पक्ष भी है जिसके अनुसार रेप के इल्जाम होने के बावजूद भी योगी सरकार आरोपी विधायक की गिरफ्तारी के मूड में नहीं थी।

पीड़िता ने मैजिस्ट्रेट के सामने विधायक का नाम नहीं लिया था
ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी विधायक के खिलाफ आरोपों को सरकार मनगढ़ंत मान रही है। बीजेपी के दो नेताओं ने हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स से पीड़ित परिवार के समाजवादी पार्टी से जुड़े होने की बात भी स्वीकारी। महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई मौत के मामले में भी विधायक को आरोपी नहीं बनाया गया है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण बिंदु है कि पीड़िता ने विधायक का नाम रेप मामले में मैजिस्ट्रेट के सामने नहीं लिया था।’

प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने भी यही बात कही थी कि पीड़िता ने कोर्ट में विधायक का नाम नहीं लिया था जबकि बाद में उसने आरोप लगाते हुए कहा कि उसने डर की वजह से पहले नाम उजागर नहीं किया था। एसआईटी जांच में सामने आया है कि पीड़िता के परिवार ने 12 जून को लड़की के गायब होने की एफआईआर और दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जबकि पीड़िता ने 17 अगस्त को ऐप्लिकेशन दर्ज कर कहा कि विधायक ने 4 जून को उसके साथ रेप किया। अरविंद कुमार ने कहा, ‘मैजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में उसने 4 जून की घटना का जिक्र नहीं किया था। इस वजह से ऐप्लिकेशन पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने कोर्ट की मदद ली।’

दोस्तों के साथ शेयर करे.....