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दिल के अरमां आंसुओं में बह गये

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भोपाल

भेल कार्पोरेट द्वारा जारी एजीएम से जीएम की प्रमोशन लिस्ट की भोपाल यूनिट में अधिकारी तारीफ करते नहीं थकते लेकिन यदि चार की जगह छह का प्रमोशन कर देते तो सोने पे सुहागा होता। उनके दिल के आरमां आंसुओं में बह गये। बात जो भी हो लेकिन इस लिस्ट में एक बार फिर कुछ काबिल अफसर पीछे रह गये हैं। इस यूनिट से 84 अपर महाप्रबंधक यूं तो प्रमोशन की कतार में थे लेकिन सिर्फ चार को ही प्रमोशन मिल पाया है। वर्ष 2009 से 2012 तक के कई अफसरों के चेहरों पर निराशा देखी गई है। उनकी किस्मत ने दगा दे दिया यह सोचकर खामोश हो गये।

एके चतुर्वेदी, अमिताभ दुबे, एमके श्रीवास्तव, जीके श्रीनिवासा, नीलम भोगल, बीके सिंह, अनंत टोप्पो, एम ईसादोर, पी पंड्या, बृजेश अग्रवाल को काफी उम्मीद थी कि उन्हें प्रमोशन मिलेगा। अब इन्हें अगले साल तक इंतजार करना पड़ेगा। स्वीचगियर विभाग से किसी का जीएम न बनना चर्चाओं में है। खास बात यह है कि इस विभाग के मुखिया खुद ईडी रह चुके है। इसको लेकर विभाग के लोग हैरान हैं। यहां से अपर महाप्रबध्ंाक नीलम भोगल और शुभ्रा चतुर्वेदी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था लेकिन इन दोनों को ही प्रमोशन नहीं मिल सका। वैसे भी इस विभाग के विषय में कहा जाता है कि जिस महाप्रबंधक को इस विभाग का अस्थाई काम सौंपा गया है वह तो विभाग में दिखाई ही नहीं देते ऐसे में एक एजीएम यहां के भगवान बने हुए हैं।

दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गया…

पब्लिक सेक्टर में पति-पत्नि को एक जगह नौकरी पर रहते हुए किसी एक का ट्रांसफर करने का नियम लागू हो या न हो लेकिन केन्द्र सरकार में यह नियम लागू है। हाल ही में भेल कार्पोरेट ने कुछ अफसरों के ट्रांसफर बाहर की यूनिट में किये हैं इसमें उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस बात की चर्चाएं प्रशासनिक स्तर पर सुनी जा रही है। कुछ लोग कहने लगे है कि यह तो एक फिल्मी गीत की तर्ज पर कि दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गया रे वाला काम कर डाला। चर्चा है कि भोपाल यूनिट से एक महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी भेल की रानीपेट यूनिट में भेज दिया गया है तो एक महिला महाप्रबध्ंाक को भेल की त्रिची यूनिट से भोपाल यूनिट में। रही बात कारखाने के एक अपर महाप्रबंधक की तो उन्हें दिल्ली कार्पोरेट आफिस रवाना होने के आदेश जारी कर दिये गये है। भले ही उन्हें वहां काम बड़ा दिया जाये लेकिन परेशानियां भी बढ़ेंगी। कहा जा रहा है कि भोपाल के इन दो अफसरों की वाईफ सरकारी नौकरी में है ऐसे में उनका ट्रांसफर बाहर करना किसी के गले नहीं उतर रहा। बेचारे अफसर भी ऐसे हैं कि वह अपना दर्द किसी से कह नहीें सकते। न ही इन जोड़ों को अलग करने का नियम राज्य सरकारों के पास हैं और न ही केन्द्र सरकार के पास फिर भी बाहर जाना पड़ेगा।

गोपु में 2018 की राजनीति गरमाई

यह पहला मौका है कि गोविन्दपुरा विधान सभा क्षेत्र में अगले विधान सभा चुनाव 2018 की राजनीति पहले से ही गरमाने लगी है। भाजपा में दो गुट आमने-सामने हैं। चर्चा है कि इस क्षेत्र के खुद भाजपा नेता इस गुटबाजी से परेशान है। एक गुट ने दूसरे गुट के नेता के सामने देख लिया तो समझ लो शामत आ गई। यहां तक की झंडे, बेनर, विज्ञापन या होर्डिंग में भी किसी का नाम या फोटो देख लिया तो पूछताछ शुरू हो जाती है। पार्टी के कार्यक्रमों का कोई अन्य एक गुट दूसरे गुट से अलग हो जाता है। पार्टी का टिकट किसी को भी मिले लेकिन इस क्षेत्र में पार्टी के दो फाड़ होने की चर्चा खुलेआम होने लगी है। वैसे भी यहां पूर्व महापौर कृष्णा गौर, महापौर आलोक शर्मा और मप्र पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक का टिकट के लिए दावेदार माना जा रहा है। चर्चा यह भी है कि पूर्व महापौर के बंगले पर वर्षो नौकरी करने वाले एक नेता को भी इस विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे का भूत सवार हो गया है। इसलिए वह दिखाने को एक गुट में शामिल हो गये हैं। लगातार उनके साथ भी दिखाई दे रहे है लेकिन भीतर ही भीतर वह कुछ केन्द्रीय नेताओं से इस क्षेत्र से टिकट दिये जाने की मांग कर रहे है। अब वह इसमें कितने सफल हो पायेंगे यह तो वक्त ही बतायेगा।

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