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दु:खी है फेब्रीकेशन के बड़े साहब

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भोपाल

भेल के मुखिया के खास होने के कारण फेब्रीकेशन के बड़े साहब फायनेंस का अनुभव न होने के बाद भी इस विभाग का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया। उसके पीछे कारण साफ था कि साहब को कहीं न कहीं प्रमोशन का लाभ मिल जाये। इसलिए उन्हें डायरेक्टर फायनेंस के इन्टरव्यू में जाने का मौका भी मिला। कार्पोरेट स्तर पर चर्चा है कि फेब्रीकेशन वाले साहब का इन्टरव्यू अल्प समय में ही हो गया। इन्टरव्यू लेने वाले उनके फे ब्रीकेशन में होने का अनुभव देखकर ही इन्टरव्यू लिया। खैर बाद में उनसे फायनेंस विभाग वापस लेकर उन्हें फि र से अपने मूल विभाग फे ब्रीकेशन में ही वापस भेज दिया।

यू तो वह जीएमआई बनने के हकदार बताये जा रहे है लेकिन कार्पोरेट प्रबंधन उन्हें यह मौका भी नहीं दे रहा है। चर्चा है कि इस बात से फे ब्रीकेशन के बड़े साहब काफी दु:खी बताये जा रहे हैं। यहां तक कि वह आजकल ईडी की मीटिंग में भी कम दिखाई देते है। लगता है कि अब वह इसी विभाग में रहना ज्यादा पसंद करेंगे। इधर इसी विभाग के एक डिप्टी मैनेजर को भी बड़े साहब की शह है। वह अपने घर पर काम करने के लिए मजदूरों को बुलाते है और हाजरी कारखाने में भरते है। इन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि इससे भेल को कितना नुकसान होता है।

मामला भेल के टीसीबी का

उत्पादन में अपनी अहम भूमिका निभाने वाला टीसीबी इस बार मुश्किल में दिखाई दे रहा है। एक तो इस विभाग में बेहतर काम कर रहे मुखिया को एक और विभाग का काम सौंपने से ट्रांसफार्मर विभाग में काफी परेशानियां दिखाई दे रही है उस पर एक और महाप्रबंधक आरके सिंह इस विभाग से 24 अप्रैल 18 को अलविदा कर रहे है। इसलिए उनका मन भी प्रोडक् शन मेंं कम दिखाई दे रहा है। साफ जाहिर है कि सारा बोझ टेक्नीकल साउंड नहीं होने के बाद भी एक अपर महाप्रबंधक को झेलना पड़ रहा है। ऐसे में प्रबंधन इस विभाग में किसी अन्य अफसर को मौका देने का कोशिश ही नहीं कर रहा है। इस कारण इसका असर उत्पादन पर पडऩे से इंकार नहीं किया जा सकता। यू तो और भी विभाग में भी कुछ इसी तरह के हाल है। एएफएक्स विभाग के एक अफसर 24 मार्च को तो सेफ्टी विभाग के दूसरे अफसर सितबंर 18 में रिटायर हो रहे है। यहां इन विभागों में नये अफसरों को बिठाना जरूरी हो गया है। एक अफसर सुनयना शर्मा जनवरी 18 में ही रिटायर हो चुकी है।

यूनियनों की यह कैसी नेतागिरी

भेल की कुछ यूनियनों की जितनी तारीफ की जाये कम ही है। यूं तो वह कर्मचारियों को हक दिलाने की बड़ी-बड़ी बाते करते है मीडिया में छाये रहना उनका शौक सा बन गया है। फे ब्रीकेशन एलएफ-1 में एक भेल कर्मचारी दीपक का 12 जनवरी 18 को हार्ट अटेक से निधन हो गया था उसके परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति दिलाने के नाम पर काफी राजनीति की और प्रबंधन इसके लिए तैयार भी हो गया और बाद में मुकर भी गया। चर्चा है कि 13 फरवरी को कुछ यूनियन प्रतिनिधि अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर मिले भी लेकिन काम फिर भी नहीं बन पाया। इसको लेकर 15 फरवरी को प्रबंधन के खिलाफ पोस्टरबाजी व प्रदर्शन करने का तीन यूनियनों ने फैसला भी ले लिया लेकिन रातों रात ऐसा क्या हुआ कि यह यूनियनें प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन नहीं कर पाई। चर्चा है कि रातों रात इन पर दबाव बनाया गया और कर्मचारी हितों की बात करने वाली यह यूनियनें अनुकम्पा नियुक्ति के मामले में चुप बैठ गई। एक यूनियन को तो यह बात काफी खल गई।

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