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दुनियाभर में गुरुकुल शिक्षा को प्रमोट करेगा RSS

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नई दिल्ली

शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संगठन ‘भारतीय शिक्षण मंडल’ गुरुकुल प्रणाली को आगे बढ़ाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा आयोजन कर रहा है। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में उज्जैन में ‘विराट गुरुकुल सम्मेलन’ मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किया जा रहा है। इस सम्मेलन में ऐसे कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं जो चाहते हैं कि उनके देश में भी गुरुकुल सिस्टम शुरू किया जाए।

इंडोनेशिया चाहता है 15 गुरुकुल
भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री मुकुल कानितकर ने बताया इंडोनेशिया चाहता है कि वहां भी गुरुकुल शुरू किए जाएं, इसके लिए इंडोनेशिया सरकार की तरफ से हिंदू स्वयंसेवक संघ के लोगों से संपर्क किया गया। जिसके बाद संघ ने इसका जिम्मा भारतीय शिक्षण मंडल को सौंपा। इंडोनेशिया सरकार शुरू में 15 गुरुकुल खोलने की योजना पर काम कर रही है। गुरुकुल के बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए विराट गुरुकुल सम्मेलन में इंडोनेशिया से भी प्रतिनिधि आ रहे हैं। इसके अलावा मॉरीशस, ट्रिनिदाद, हॉलैंड और नॉर्वे से भी प्रतिनिधि सम्मेलन में आ रहे हैं। वे भी अपने देश में गुरुकुल शुरू करना चाहते हैं। जिन देशों में गुरुकुल जैसा सिस्टम पहले से चल रहा है उन देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में आकर अपने अनुभव साझा करेंगे। इसमें नेपाल, भूटान, म्यांमार शामिल हैं।

गाइडलाइन बनाने की कोशिश
कानितकर ने बताया कि इस सम्मेलन का मकसद अलग-अलग तरीके से चल रहे गुरुकुल को एक मंच पर लाना है। उन्होंने कहा कि इससे विभेद दूर होंगे और एक दूसरे से बेस्ट प्रैक्टिस भी सीख सकेंगे। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के जरिए नए गुरुकुल बनाने को लेकर एक गाइडलाइन तैयार करने की कोशिश भी रहेगी। सम्मेलन में करीब 1000 गुरुकुलों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। इस सम्मेलन का उद्घाटन संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे और संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी भी सम्मेलन में मौजूद रहेंगे।

गुरुकुल में पढ़ाई के तरीके का फर्क
कानितकर ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल की प्रेरणा से अभी देशभर में 15 गुरुकुल चल रहे हैं। गुरुकुल में पढ़ाने के तरीके का फर्क है। यहां पढ़ाई व्यक्ति की रुचि के हिसाब से होती है। सबको साथ बैठाकर रटाने पर यकीन नहीं है। एक विषय पूरा आने पर ही अगली सीढ़ी पर जाते हैं। जरूरी नहीं कि स्टूडेंट एक साल बाद दूसरी कक्षा में चले जाए। हो सकता है कि कोई स्टूडेंट वेद की पहली क्लास में हो और संगीत की तीसरी क्लास में। सब स्टूडेंट एक साथ आगे नहीं बढ़ते। यहां प्रक्रिया टीचिंग ओरिएंटेड नहीं लर्निंग ओरिएंटेड है। हालांकि गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चों को कोई स्पेसिफिक डिग्री नहीं दी जाती। यहां शास्त्रीय या आचार्य की उपाधि मिलती है। उन्होंने कहा कि कोई स्टूडेंट फॉर्मल स्कूलिंग चाहते हैं तो वह ओपन यूनिवर्सिटी के जरिए यह कर सकते हैं।

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