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दुष्यंत दवे का दावा: बीजेपी के करीबी हैं लोया केस की सुनवाई करने वाले जज

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की ओर से चीफ जस्टिस पर केसों के आवंटन में पक्षपात का आरोप लगाए जाने के बाद सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने सनसनीखेज दावा किया है। दवे ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि सीबीआई के विशेष जज रहे जस्टिस लोया की मौत के मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस अरुण मिश्रा के बीजेपी और शीर्ष नेताओं से करीबी संबंध हैं। दवे ने कहा, ‘हर कोई जानता है कि जस्टिस अरुण मिश्रा के बीजेपी और शीर्ष राजनेताओं के साथ करीबी संबंध हैं।’ यही नहीं उन्होंने कहा कि जस्टिस अरुण मिश्रा को लोया केस की सुनवाई नहीं करनी चाहिए

हालांकि पूरे मामले को एक नया मोड़ देते हुए जस्टिस लोया केस की संदिग्ध मौत की जांच की मांग करने वाले एक याचिकाकर्ता ने टाइम्स नाउ को बताया कि दवे ने उन पर दबाव डाला था कि वे अरुण मिश्रा की बेंच से अपना केस वापस ले लें। मामले में याची कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने कहा कि दवे ने उन पर भी केस को वापस लेने का दबाव बनाने की कोशिश की थी।

कहा जा रहा है कि दवे ने पूनावाला को कथित तौर पर यह समझाने की कोशिश की कि जस्टिस अरुण मिश्रा चीफ जस्टिस के ‘गुर्गे’ हैं और उनके नेतृत्व वाली बेंच को इस केस की सुनवाई नहीं करनी चाहिए। पूनावाला ने कहा कि दवे सुप्रीम कोर्ट में उनके अधिवक्ता के तौर पर पेश होने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन यह जानने के बाद कि इस मामले की सुनवाई अरुण मिश्रा करेंगे, उन्हें सुझाव दिया कि इसे सुप्रीम कोर्ट से वापस लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर करना चाहिए।

कांग्रेस समर्थक पूनावाला ने जब याचिका को वापस लेने से इनकार कर दिया तो दवे उनसे नाराज हो गए और कहा कि अब कोर्ट में तुम खुद अपना पक्ष रखना। पूनावाला ने दावा किया कि शुक्रवार को जब मामले की सुनवाई चल रही थी तो किसी भी वादी की तरफ से पेश न होने वाले दवे ने बेंच के सामने कहा कि पूनावाला को इस केस को वापस लेने की इजाजत देनी चाहिए।

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