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दो नाव पर सवार एजीएम साहब

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भोपाल

भेल के कुछ अफसरों के अजीबों गरीब किस्से है। जिस विभाग से उनका तबादला दूसरे विभाग मेें किया है ऐसा लग रहा है कि उनकी वहां जाने की कोई दिलचस्पी ही नहीं हैं। यह पावरफुल साहब एजीएम से जीएम बनने की कतार में खड़े है। यह जीएम बन पायेंगे कि नहीं यह तो लिस्ट निकलने के बाद ही पता चलेगा। चर्चा है कि एजीएम साहब दो नाव पर सवार हैं। इनका तबादला मासप्र कर दिया गया है। साहब को इस विभाग में जाने में कोई दिलचस्पी नहीं है इसलिए वह अपने पुराने विभाग में ही पुरानी फाईलें खंगाल रहे हैं।

लगता है यह उनके लिए काफी मलाईदार विभाग रहा है। इसलिए बकाया लेनदारी-देनदारी खत्म करने में लगे हुए हैं। जब इनका तबादला मासप्र किया तो प्रशासनिक भवन में यह चर्चाएं शुरू हो गई कि साहब को अपर महाप्रबंधक बने हुए भले ही पांच साल हो गये हों लेकिन मासप्र विभाग उनके प्रमोशन में रूकावट बन सकता हैं यानी दौड़ से बाहर हो गये हैं। अब वह कितनी ही जुगाड़-तुगाड़ कर ले उन्हें वापस अपने पसंदीदा विभाग भेल के मुखिया नहीं भेजने वाले हैं।

और भेल के ठेकेदारों की परेशानी

जब से जीएसटी लागू हुआ है तब से भेल के ठेकेदारों की नींद हराम है। इसके चलते समय पर भुगतान न होने से जो ठेकेदार मूछ पर ताव देकर लाखों-करोड़ों की बात करते थे वह आजकल हजारों की बात करने से भी कतराने लगे हैं। उसपर वित्त विभाग में एक अकाउंट आफिसर ठेकेदारों पर दादागिरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। एक तो ठेकेदारों के पास काम नहीं ऐसे में एकाउंट आफिसर चेक की लिस्ट गुमा देते हैं तो कभी एक बिल में कई आपत्तियां ठोंक देते हैं। चर्चा है कि उन्होंने अब एक नया फरमान सभी बिल एचआर विभाग को चेक करने का जारी कर दिया है। वह भी बिना किसी से चर्चा किये। अब सारे ठेकेदार माथे पर हाथ रखकर एकाउंट आफिसर को कोसतें नजर आ रहे है। साफ जाहिर है कि उनके सारे बिल रूक गये है। अब साहब की ठेकेदारों से क्या नाराजगी है यह तो वहीं जाने।

कस्तूरबा में दंत चिकित्सा का बुरा हाल

यदि आप बीमार हुये तो मानकर चलिये आपको भेल को मिले महारत्न का खि़ताब भूलना पड़ेगा क्योंकि कस्तूरबा अस्पताल यूं तो अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है लेकिन दंत चिकित्सा विभाग की हालत ज्यादा गंभीर है। चर्चा है कि कस्तूरबा में 6000 भेल कर्मचारी महज दो दंत चिकित्सक के भरोसे है। एक सीनियर तो दूसरा जूनियर।मजेदार बात यह है कि यहां दांतों का मामूली इलाज ही होता है। मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन रजिस्ट्रेशन कराने से कोसों दूर है। कर्मचारियों में चर्चा है कि भारत का हर दूसरा व्यक्ति दांतों की बीमारियां पायरिया, इम्प्लांट, आड़े तिरछे दांतों के इलाज से पीडि़त मरीजों के लिए किसी अस्पताल से अनुबंध तक नहीं है। खबर है कि भेल की ट्रेड यूनियनें भेल प्रशासन  के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रही है। यूनियनों की मानें तो भेल ना तो इसके प्रति गंभीर है न दंत चिकित्सा के प्रति इसका रूझान है।

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