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धर्म कभी भारत की पहचान नहीं बन सकता, नफरत से देश को नुकसान- प्रणब मुखर्जी

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नागपुर

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी ने नागपुर के रेशमीबाग स्थित आरएसएस मुख्यालय में संघ के तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण लेने वाले काडर को संबोधित किया. कार्यक्रम से पहले प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी. अपने संबोधन में प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत सहिष्णुता से अपनी ताकत प्राप्त करता है, और कोई असहिष्णुता केवल हमारी राष्ट्रीय पहचान को खत्म कर देगी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपने विचार रखे. RSS के मंच से प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘मैं यहां पर राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति समझाने आया हूं. भारत दुनिया का पहला राज्य है और इसके संविधान में आस्था ही असली देशभक्ति है. उन्होंने कहा कि विविधतता हमारी सबसे बड़ी ताकत है. हम विविधता में एकता को देखते हैं. हमारी सबकी एक ही पहचान ‘भारतीयता’ है.’

प्रणव मुखर्जी ने कहा, मैं अपने विचारों को साझा करना चाहता हूं जो मैंने पिछले 50 वर्षों में महसूस किया है. भारत की आत्मा बहुलवाद में निहित है. धर्मनिरपेक्षता और हमारी समग्र प्रकृति हमें भारत बनाती है. धर्मनिरपेक्षता मेरे लिए विश्वास का विषय है और हमारे लिए होना चाहिए. यह एक समग्र संस्कृति है जो हमारे देश को बनाती है, ” जैसा कि गांधी जी ने समझाया कि भारतीय राष्ट्रवाद अनन्य नहीं, न ही आक्रामक और न ही विनाशकारी था

पंडित नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ पुस्तक में स्पष्ट रूप से व्यक्त किया, उन्होंने लिखा, “मुझे विश्वास है कि राष्ट्रवाद केवल हिंदू, मुसलमानों, सिखों और भारत के अन्य समूहों के विचारधारात्मक एकता से बाहर आ सकता है.” प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारत एक धर्म, एक भाषा का देश नहीं है. राष्ट्रवाद जाति, धर्म ,भाषा से ऊपर है.

मुखर्जी ने कहा, भारत की आत्मा सहिष्णुता में बसती है. अलग रंग, अलग भाषा, अलग पहचान है.हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई की वजह से यह देश बना. कई राजवंशों, शक्तिशाली साम्राज्यों ने उत्तरी और दक्षिणी भागों में भारत पर शासन किया. प्रणब मुखर्जी ने कहा, अगर हम भेदभाव और नफरत करेंगे तो हमारी पहचान को खतरा. सहिष्णुता हमारी ताकत है. भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हैं.उन्होंने कहा कि, धर्म कभी भारत की पहचान नहीं बन सकता, नफरत से देश को सिर्फ नुकसान है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारत वसुधैव कुटुंबकम का देश हैं. भारत में महाजनपदों की परंपरा रही है. हम विविधता का सम्मान करते हैं. विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है. प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारत में राष्ट्रवाद की परिभाषा यूरोप से अलग है. उन्होंने कहा, भारत पूरे विश्व में सुख शान्ति चाहता है. प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारत पूरे विश्व को परिवार मानता है. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हिन्दुस्तान एक स्वतंत्र समाज है. भारत में विश्वविद्यालय की परंपरा बहुत पुरानी है. 1800 साल तक भारत शिक्षा का केंद्र था.. प्रणब मुखर्जी ने कहा, मैं राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं उन्होंने कहा, राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान होती है. देश के लिए समर्पण ही राष्ट्रभक्ति है.

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