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ध्यान योग में मस्त है दो साहब

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भोपाल

भेल कारखाने के फेब्रीकेशन के दो अफसरों की जितनी तारीफ करें कम है। इन दोनों का काम में कम और ध्यान योग में ज्यादा मन लगा रहता है। चर्चा है कि यह हार्ट का कनेक्शन भगवान से जोडऩे में लगे रहते हैं और काम के दौरान दिन में दो बार ध्यान योग के लिए निकलकर सहज मार्ग तलाशते रहते हैं। इससे विभाग को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन दोनों अफसरों का आपसी कनेक्शन सालों से है। मजेदार बात यह है कि फे ब्रीकेशन विभाग में काफी समय पहले ट्रांसफार्मर टैंक इसलिए बनाये जाते थे कि यहां मेन पॉवर की कमी नहीं थी। अब यह हो रहा है कि मेन पॉवर होते हुए भी विभाग करीब 30 से 40 करोड़ का काम प्रायवेट इंसलरियों को भेजने में देरी नहीं करते। इससे भेल को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

यह अफसर द्वय ध्यान योग से कब मुक्त होंगे और कंपनी का फायदा सोचेंगे इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस विभाग के एक जीएम एसएन मिश्रा रिटायर हो गये हैं। अब वक्र्स कॉन्ट्रेक्ट विभाग के एक एजीएम को यहां का अतिरिक्त काम सौंपा गया है। वैसे भी 14 साल एएसएक्स विभाग में रह चुके एक अफसर को इस विभाग में पॉवरफुल बनाकर बिठा रखा है। इसके पीछे उन्हें जीएम बनाने की मंशा साफ दिखाई दे रही है। फिलहाल इस विभाग से इन दो अफसरों का ध्यान योग से मन हटाना जरूरी हो गया है।

राजीव और बागची जायेंगे बाहर!

भेल भोपाल यूनिट में अपनी नौकरी का ज्यादातर समय बिताने वाले दो महाप्रबंधकों का इस यूनिट से बाहर जाना लगभग तय माना जा रहा है। मजेदार बात यह है कि यह दोनों ही अफसर ईडी पद के प्रबल दावेदार माने जा रह हैं। चर्चा है कि हाइड्रो के महाप्रबंधक राजीव सिंह को हैदराबाद या हरिद्वार यूनिट भेजा जा सकता है। हैदराबाद यूनिट के जीएमआई का भेल के डायरेक्टर पद पर चयन हो चुका है। और यह पद डायरेक्टर अमिताभ माथुर के मई 2018 में रिटायर होते ही खाली हो जायेगा। यही हालात हरिद्वार यूनिट के बन रहे है यहां के जीएमआई सुनिल गुलाटी को यदि डायरेक्टर पॉवर बने तो यह पद भी खाली हो जायेगा। ऐसे में राजीव सिंह को मौका मिल सकता है। खबर यह भी है कि टीके बागची ने ट्रांसफार्मर विभाग में लंबे समय काम किया है इसलिए उन्हें झांसी या किसी अन्य यूनिट में भेजा जा सकता है। झांसी यूनिट के मुखिया भी 2019 में रिटायर हो जायेंगेे। चर्चा है कि नवंबर 2019 में रिटायर होने वाले जीएम एचआर व क्वालिटी को रूद्रपुर यूनिट का रास्ता दिखाया जा सकता है। भोपाल कॉडर के जीएम पीके सिन्हा रूद्रपुर से भोपाल आने को बेताब हैं। भेल के मुखिया इस बार बड़े स्तर पर प्रशासनिक फे रबदल कर सकते हैं। इसलिए प्रोडक्शन से जुड़े अफसरों को बेहतर विभाग मिल सकते हैं। कहा जा रहा है कि जहां कंपनी के पास 50,000 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर है तो भोपाल यूनिट के पास 2400 करोड़ से ज्यादा के है।

भेल का हाइड्रो नंबर वन

पिछली बार उत्पादन में अपनी अहम भूमिका निभाने वाला ट्रांसफार्मर विभाग नंबर वन रहा और वित्तीय वर्ष 2017-18 में हाइड्रो नंबर वन हो गया। चर्चा है कि हाइड्रो अंतिम समय में बाजी मारकर 830 से 875 के बीच पूरा कर सकता है जबकि ट्रांसफार्मर भी 800 से ऊपर का आंकड़ा पार कर सकता है। यूं तो ईएम ग्रुप, टीपीटीएन, स्वीचगियर,थर्मल और फीडर्स ग्रुप भी आखिरी समय में अवकाश के दिन रविवार को तैयार जॉब को बाहर निकालने में लगे रहे। अंतिम समय में भेल के मुखिया टारगेट को कहां पहुंचायेंगे यह तो वक्त ही बतायेगा, लेकिन हाइड्रो और ट्रांसफार्मर का टारगेट यहां के महाप्रबंधकों को कहां पहुंचायेगा यह चेयरमेन साहब के पाले में है फिलहाल इन विभागों की बेहतर परफार्मेंस की तारीफ करते नहीं थकते। इधर नगर प्रशासन विभाग ने भी वाहवाही लूटने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। खबर है कि पिछली बार जहां राजस्व वसूली का रिकार्ड 20 करोड़ था वहीं इस बार 21 करोड़ पर पहुंच गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए कंपनी के पास 51 हजार करोड़ के आर्डर मिलना अपने आप में रिकार्ड है। इसमें चेयरमेन साहब की भी अहम भूमिका दिखाई दे रही है। साफ जाहिर है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में कंपनी में आर्डरों की कुछ खास कमी नहीं रहेगी।

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