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नई टीम तैयार करने में जुटे ईडी

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भोपाल

31 मार्च को भेल वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद ईडी साहब अब नई टीम तैयार करने में जुट गये हैं। देखा जा रहा है कि महाप्रबंधक स्तर के अफसरों की कमी लगातार होती जा रही है। पिछले साल संजीव गुप्ता, एके वर्मा और मुकेश मंगला रिटायर हो चुके है इसी तरह महाप्रबंधक एमके वर्मा, संजय गुलाटी, एके जैन का तबादला बाहर की यूनिट में हो गया है और इस साल आरके सिंह और एम हलदर रिटायर हो जायेंगे। वहीं महाप्रबंधक द्वय राजीव सिंह और टीके बागची का लगभग इस यूनिट से जाना तय माना जा रहा है। साफ जाहिर है कि इस यूनिट को इन अफसरों की कमी खलेगी। इसको लेकर कई प्रमुख विभाग खाली हो जायेंगे। इसको लेकर भेल के मुखिया न केवल चिंतित है बल्कि नई टीम बनाने के लिये मंथन भी कर रहे हैं।

भेल के हाइड्रो, टीसीबी, फीडर्स, डब्ल्यूई, प्लानिंग डिपार्टमेंट,ईएम और सीडीसी में बेहतर परफार्मेंस वाले अफसरों को बिठाने की कोशिश करेंगे। आरके सिंह की जगह विनय निगम को टीसीबी में बिठाने में सफलता के बाद मुखिया यदि श्री बागची बाहर जाते है तो यहां की पूरी बागडोर श्री निगम को सौंप सकते है। इधर जून में एजीएम से जीएम की प्रमोशन लिस्ट भी जारी होना है। इस बार एजीएम से जीएम प्रमोशन में खुला खेल खेला जायेगा।

कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना

भेल कारखाने में यूनियन और प्रबंधन के बीच खुला संवाद पिछले एक साल में इतना ज्यादा बिगड़ गया है कि इसके सुधरने के आसार ही नजर नहीं आ रहे है। इन सब बातों से बेखबर महाप्रबध्ंाक मानव संसाधन विभाग को कोई चिंता ही नहीं दिखाई दे रही है। वह बेचारे करें भी तो क्या करें उन्हें दो-दो विभाग का काम दे रखा हैं। अब उनके आफिस में सन्नाटा नजर आता है। चर्चा है कि उनकी अकड़ के चलते न तो यूनियन प्रतिनिधि जाना पसंद करते है और न ही मीडिया कर्मी, तो ऐसे में मानव संवाद का क्या हाल होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। चर्चा है कि पहली बार चुनी हुई तीन यूनियनों में से दो यूनियन ऑल इंडिया भेल एम्प्लाईज यूनियन और बीएमएस ने गत शनिवार को सांची गेस्ट हाउस में प्लांट कमेटी की बैठक का लिखित में बहिष्कार कर डाला। मजेदार बात यह है कि कोरम के अभाव में प्रबध्ंान ने सिर्फ एक यूनियन इंटक के साथ बैठक भी कर डाली ऐसे चल रहा है भेल का मानव संसाधन विभाग। दरअसल दो यूनियनों ने महाप्रबंधक मानव संसाधन का गुस्सा न केवल भेल के मुखिया पर उतार डाला बल्कि कई आरोप भी जड़ दिये और मुखिया हैं कि महाप्रबंधक मानव संसाधन से अपनी दोस्ती निभाने में लगे हैं। अब यूनियन प्रतिनिधि कहने लगे हैं कि होगी तो आरपार की लड़ाई होगी।

शकुनि मामा के रोल मेंं डीजीएम साहब

भेल कारखाने में कुछ कलाकार टाईप अफसरों की चर्चाएं भी थमने का नाम नहीं ले रही है। एक अफसर तो ऐसे हैं कि प्रशासनिक स्तर पर उन्हें शकुनि मामा के रूप में देखा जाता है यहीं कारण है कि कुछ विभाग के अफसर अपने काम निपटाने के लिए एडवाइस लेते रहते हैं। परचेस व वक्र्स पॉलिसी के मास्टर माइंड डीजीएम साहब वर्ष 2012 तक स्वीचगियर एमएम में काम कर चुके हैं। ज्यादा दिमाग चलाते-चलाते उन्होंने यहां एक बड़ी गड़बड़ी कर डाली, जिसके चलते उनका ट्रांसफर एमएम थर्मल में कर दिया गया। अब उनके मास्टर माइंड दिमाग का कई अफसर उपयोग करने में लगे हैं। तो डीजीएम साहब की निगाहें परचेस डिपार्टमेंट के किसी महत्वपूर्ण मलाई दार पद पाने में लगी हुई है। यूं भी प्रशासनिक भवन के थर्ड फ्लोर पर उनकी चर्चाएं अधिकारी करते नजर आते हैं।

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