Home राजनीति नहीं बनेगा तीसरा मोर्चा, विपक्ष एकजुट होकर लड़ेगा अगला चुनाव: शरद यादव

नहीं बनेगा तीसरा मोर्चा, विपक्ष एकजुट होकर लड़ेगा अगला चुनाव: शरद यादव

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नई दिल्ली

आगामी लोकसभा चुनावों में भले ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव बीजेपी और कांग्रेस से मुकाबला करने के लिए संघीय मोर्चे बनाने में जुटे हों लेकिन, पूर्व जेडीयू नेता शरद यादव ने तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद को सिरे से खारिज कर दिया है। वरिष्ठ नेता ने बीजेपी की चुनौती से निपटने के लिए तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद को नकारते हुए सभी विपक्षी दलों के एकजुट होने का भरोसा जताया है।

शरद यादव ने दो टूक कहा कि तीसरा मोर्चा बनने के कोई आसार नजर नहीं आते। साथ ही उन्होंने दावा किया अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद से विपक्ष की एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं, मौजूदा दौर की तुलना आपातकाल से करते हुए शरद यादव ने कहा कि इस समय भी देश का सामाजिक तानाबाना संकट में है।

‘तीसरा मोर्चा बनाने वाले ही साझा विपक्ष की बात करेंगे’
टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी और टीआरएस प्रमुख चंद्रशेखर राव द्वारा तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद से विपक्ष की एकता के प्रयासों को धक्का लगने के सवाल पर पूर्व जेडीयू नेता ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि तीसरा मोर्चा वजूद में आएगा। कुछ समय इंतजार करें। तीसरा मोर्चा बनाने वाले ही साझा विपक्ष की बात करेंगे।’ इस भरोसे का आधार बताते हुए उन्होंने कहा ‘इस बार संविधान को बचाने की चुनौती है, इसके लिए ‘साझा विरासत’ के मंच पर सभी दलों और संगठनों को एकजुट करने में मिली कामयाबी से मैं आश्वस्त हूं कि सभी विपक्षी दल, मोदी सरकार की वजह से उपजे संकट से देश को उबारने के लिए तत्पर हैं।’

विपक्षी एकजुटता ही एकमात्र विकल्प: शरद
यादव ने कहा कि वह सभी दलों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और समय आने पर सबको एकजुट कर दिखाएंगे। विपक्षी दलों की एकजुटता को ही एकमात्र विकल्प बताते हुए यादव ने कहा कि क्षेत्रीय और निजी हितों की खातिर जो दल इस जरूरत को नजरंदाज करेंगे, उन्हें भविष्य में बीजेपी ही सबक सिखाएगी। यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर समान विचारधारा वाले सभी विपक्षी दलों की एकजुटता, गंभीर चुनौती जरूर है लेकिन यह चुनौती नामुमकिन नहीं है।

‘अनुभव को नकारने भुगतना पड़ता है खामियाजा’
कांग्रेस, एसपी, आरजेडी और आरएलडी सहित अन्य विपक्षी दलों की कमान संभाल रहे युवा नेतृत्व की गलतियों से बीजेपी के मजबूत होने के सवाल पर यादव ने कहा, ‘अनुभव को नकारने की गलती का खामियाजा भुगतना होता है और इस गलती को सुधारने का परिणाम भी तुरंत मिलता है।’ उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव की बात नहीं मानने और बाद में भूल सुधार कर उपचुनाव में बिएसपी से हाथ मिलाने का परिणाम सामने है।

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