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नोटबंदी: अग्रवाल का सवाल, BJP फिर असहज

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नई दिल्ली

समाजवादी पार्टी (SP) छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के कारण लगातार दूसरे दिन पार्टी के लिए असहज स्थिति बन गई। दरअसल, कुछ दिन पहले अग्रवाल ने केंद्र सरकार से सवाल पूछकर यह जानना चाहा था कि क्या उसने यह स्वीकार किया है कि नोटबंदी सबसे बुरा फैसला था? दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय मंत्री ने मंगलवार को जब इस सवाल का जवाब सदन में रखा, अग्रवाल बीजेपी में आ चुके थे। गौरतलब है कि SP की ओर से दोबारा उच्च सदन नहीं भेजे जाने से नाराज अग्रवाल सोमवार को बीजेपी में शामिल हो गए। उसी दिन वह जया बच्चन पर अपनी टिप्पणी से विवादों में आ गए थे।

उन्होंने राज्यसभा में जया बच्चन को तरजीह दिए जाने पर SP को निशाना बनाते हुए कहा कि पार्टी ने उनकी तुलना फिल्म अभिनेत्री से की है ‘जो फिल्मों में नाचती थीं।’ उनके ऐसा कहते ही वहां मौजूद बीजेपी नेता असहज हो गए। बीजेपी ने फौरन पार्टी में आए नए मेहमान के बयान से खुद को अलग कर लिया था।

दरअसल, कुछ दिनों पहले अग्रवाल ने नोटबंदी पर वित्त मंत्री से लिखित रूप से प्रश्न पूछा था और उसका जवाब मंगलवार को सदन में रखा गया। अग्रवाल ने जानना चाहा था कि क्या ‘यह सच्चाई है कि सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि नोटबंदी का उसका कदम एक बुरा फैसला था और यदि ऐसा है तो कारण क्या हैं?’ वित्त राज्य मंत्री पी. राधाकृष्णन ने सदन में लिखित जवाब रखा। उन्होंने सवाल के पहले हिस्से के जवाब के तौर पर ‘नहीं’ कहा और दूसरे हिस्से के बारे में कहा कि ‘सवाल पैदा ही नहीं होता’।

राज्यसभा के नियमों के तहत कोई भी सांसद किसी भी मंत्री से 15 दिन पहले लिखित रूप से सवाल पूछ सकता है। इस सवाल का नोटिस लिखित में राज्यसभा के महासचिव को दिया जाता है और इसमें उस मंत्री का नाम होना चाहिए जिससे यह सवाल पूछा गया है। इसके अलावा वह तारीख भी प्रस्तावित की जा सकती है जिस दिन के सवालों में इसे जवाब के लिए शामिल किया जाना है।

इसी सवाल में अग्रवाल ने कहा था कि अगर फैसला बुरा नहीं था तो सरकार यह बताए कि 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 के पुराने नोटों को अमान्य घोषित किए जाने से किन क्षेत्रों को फायदा हुआ। जवाब में राधाकृष्णन ने कहा कि नोटबंदी से जाली मुद्रा खत्म हो गई और आतंकी गतिविधियों पर करारा प्रहार किया गया। ब्लैक मनी के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई थी और इससे अर्थव्यवस्था बेहतर और डिजिटाइजेशन की ओर बढ़ी।

उन्होंने आगे कहा, ‘फर्जी भारतीय करंसी का इस्तेमाल आतंकियों और नक्सलियों द्वारा किया जा रहा था। नोटबंदी के परिणामस्वरूप आतंकियों और नक्सलियों की फंडिंग पूरी तरह से बंद हो गई।’ उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है। इसके अलावा उन्होंने 8 नवंबर 2016 के बाद खातों में जमा कराई गई धनराशि के आंकड़े भी रखे, जिस पर शिकंजा कसा जा रहा है।

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