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न्यूक्लियर डील: फ्रांस को अब इस खतरे का डर, मैक्रों ने ट्रंप को किया फोन

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ईरान के साथ न्यूक्लियर डील खत्म करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले की विश्व में आलोचना हो रही है. अमेरिका के पुराने दोस्त फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने इस पर चिंता जाहिर कर चुके हैं. वहीं, ईरान से न्यूक्लियर डील खत्म होने के बाद फ्रांस को अब मीडिल ईस्ट में तनाव और अशांति का डर है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बात को लेकर अपने ‘दोस्त’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की.

मैक्रों के ऑफिस ने इस बात की पुष्टि की है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति के सरकारी दफ्तर के मुताबिक, शनिवार को मैक्रों और ट्रंप के बीच फोन पर कुछ देर तक बातचीत हुई. इस दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मीडिल ईस्ट देशों में ‘अस्थिरता और अशांति’ की आशंका जाहिर की.दरअसल, इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के साथ न्यूक्लियर डील खत्म करने के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का विरोध किया है. फ्रांस का कहना है कि ईरान न्यूक्लियर डील को अमेरिका ने भले ही ठुकरा दिया है, लेकिन अभी यह खत्म नहीं हुई है.

फ्रांस के अधिकारियों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के बाद इमैनुअल मैक्रों ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से बात करने वाले हैं. बता दें कि ईरान न्यूक्लियर डील पर पी5 + 1 (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी) देशों ने सहमति जताई थी. गुरुवार को अमेरिका ने ईरान के साथ इस डील के खत्म होने का ऐलान किया.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतेरेस ने ट्रंप को न्यूक्लियर डील खत्म करने को लेकर चेताया था.रूस और चीन ने भी ट्रंप के इस फैसले पर ऐतराज जाहिर किया है. वहीं, ईरान ने चेतावनी दी कि अगर यूरोपीय देशों ने डील की सुरक्षा का वादा नहीं दिया, तो वह औद्योगिक स्तर पर यूरेनियम संवर्धन शुरू कर देगा.

ईरान के साथ न्यूक्लियर डील खत्म होने से भारत समेत दूसरे एशियाई देशों पर भी इस कदम का कई रूप में प्रभाव पड़ सकता है. तेल पैदा करने और निर्यात करने वाले OPEC देशों में ईरान तीसरे नंबर पर है. खासकर एशियाई देशों को ईरान बड़े पैमाने पर तेल सप्लाई करता है. भारत में सबसे ज्यादा तेल इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान से आता है. भारत इस आयात को और बढ़ाने वाला है.

इसके अलावा अंतराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा यानी INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस और यूरोप से जोड़ने की परियोजना है, जो कारोबार को आसान बनाएगा. फिलहाल ये योजना भी अधर में जा सकती है. क्योंकि अमेरिका के न्यूक्लियर डील खत्म करने से ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा.

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