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पांच और दस साल के फेर में उलझा भेल कर्मचारियों का वेज रिवीजन

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भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड(भेल) के कर्मचारियों का वेज रिवीजन पांच और दस साल के फेर में उलझ कर रह गया है। ऐसे में वेज रिवीजन का मामला जुलाई तक टल गया है। अब इसका फैसला ज्वाइंट कमेटी की अगली बैठक में होगा। मीटिंग प्रबंधन द्वारा बताया गया कि सरकार द्वारा तय डीपीई गाइड लाइन द्वारा भेल में कार्य करना तय हुआ है। प्रबंधन ने जब यह प्रस्ताव दिया के वेज रिवीजन 10 साल के लिये होगा तो यूनियन प्रतिनिधियों ने यह जानना चाहा की 5 साल या 10 साल में क्या फर्क है और इस से क्या फायदा और क्या नुकसान है।

सेंट्रल लीडर डॉ जी संजीवा रेड्डी का कहना था कि पहले अन्य कंपनियों के पे रिवीजन दिखाएं उसके बाद तय करेंगे कि हमें क्या निर्णय लेना है। इस पर प्रबन्धन ने 15 जुलाई के पहले बताने की बात कही है। इंटक के प्रवक्ता सीआर नामदेव के मुताबिक भेल प्रबंधन का तर्क था कि भेल की क्षमता 30000 मेगावाट है पर हमारे पास वर्तमान में 5000 मेगावाट के ही ऑर्डर हैं। कोल द्वारा मिथेन बनाने की ज्यादा मांग है इसके लिए प्रयास किये जा रहे है । यही बात आल इंडिया भेल एम्प्लाईज यूनियन के अध्यक्ष रामनारायण गिरी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया।

उन्होंने बताया कि बैठक में सिर्फ यूनियन के द्वारा प्रबंधन के सामने अनुकंपा नियुक्ति की पुरजोर आवाज उठाई गई है जिसमे एचएमएस सेंट्रल लीडर द्वारा समर्थन किया गया एवं 1 करोड़ रुपये के जीवन बीमा के साथ ही साथ भेल भोपाल के कस्तूरबा हॉस्पिटल की दयनीय स्थिति से भी प्रबंधन को अवगत कराया गया है इस पर सीएमडी द्वारा अनुकंपा नियुक्ति एवं जीवन बीमा के मुद्दे पर सकारात्मकता दिखाई गई एवं आश्वासन दिया कि ये मुद्दे गंभीर है और प्रबंधन इस पर सकारात्मक रूप से विचार कर रही है जल्द ही इन मुद्दों पर कुछ निर्णय लिया जाएगा। इस संबंध में एचएमएस के महामंत्री अमर सिंह राठौर का कहना है कि ज्वाइंट कमेटी की बैठक में सिर्फ वेज रिवीजन पर ही चर्चा हुई।

जेसीएम की मीटिंग में इंटक अध्यक्ष आरडी त्रिपाठी, गौतम मोरे, राजेश शुक्ला, वीरेंद्र रैकवार ऑल इंडिया भेल एम्प्लाईज यूनियन के केंद्रीय महासचिव एन. जयंती मैडम, अध्यक्ष एवं भोपाल इकाई महासचिव रामनारायण गिरी और दिल्ली कॉर्पोरेट ऑफिस से यूनियन के महासचिव सुधांशु बिस्वाल,एटक के महासचिव एम महादेवन, एचएमएस के महासचिव हरभजन सिंह सिद्धु, बीएमएस के नेता अंगु स्वामी शामिल थे।

इधर केटीयू के महामंत्री एम फारूख का कहना है कि भेल महारत्न अपना खुद का आर्थिक स्टेंडर्ड सेट नही कर सकता जो दूसरीं कम्पनियों की स्टेडी करेंगे फिर वही एक जवाब भी मिलेगा कि दूसरीं कम्पनियों के परफार्मेंस और प्रॉफिट ज्यादा है, हमारे ओवरहेड ज्यादा है। उनका कहना है कि महारत्न कम्पनी के लिए सामने प्रश्न तो यह है कि 14 मई की मीटिंग रखने का क्या औचित्य था। जब सभी यूनिटों से प्रतिनिधि पहुंच ही गये थे तो मीटिंग में वेजरिवीजन के अलावा भी अन्य बहुत से ज्वलंत मुद्दे थे जिन पर निर्णय हो सकता था। ऐसे में इस मीटिंग पर लाखों खर्च करने की जरूरत ही क्या थी।

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