Home राज्य पिता की ‘सेंसरशिप’ पर बेटी ने उठाई आवाज

पिता की ‘सेंसरशिप’ पर बेटी ने उठाई आवाज

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फरीदाबाद

एनआईटी निवासी 19 साल की लड़की के लिए पिता के बनाए नियम इतने कठोर हो गए कि उसे मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग में शिकायत करनी पड़ी। पिता की सेंसरशिप के खिलाफ दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली लड़की ने शिकायत दी कि उसे अपने पिता को लिखित में देना पड़ता है कि सोशल साइट्स से दूरी बनाकर रहेगी, कुकिंग सीखेगी और कार ड्राइविंग सुधारेगी। महिला आयोग ने पुलिस कमिश्नर ऑफिस में सोमवार को करीब 2 घंटे चली सुनवाई के बाद मामले की जांच का जिम्मा एसीपी क्राइम अगेंस्ट विमिन पूजा डाबला को सौंपा है। लड़की के मां-बाप पहले एक साथ रहते थे, जबकि वह अकेली उसी घर में रहती थी, लेकिन अब वह अपनी मां के साथ रहती है। लड़की का पिता अपनी छोटी बेटी के साथ मकान के दूसरे फ्लोर पर अलग रहता है।

सुनवाई करने वाला पैनल भी उलझा
सुनवाई में पहुंचे पति-पत्नी व बेटी का पक्ष सुनकर महिला आयोग की सदस्य, पुलिस अधिकारी व विधायक सीमा त्रिखा, वकीलों का पैनल भी उलझ कर रह गया। बेटी की मांग है कि पिता उसकी निजता में दखल देने के साथ उसका उत्पीड़न करता है, इसलिए वह अब पिता के दखल से मुक्ति चाहती है और पिता उसको आगे की पढ़ाई के लिए फीस व खर्च दे। वहीं पिता का कहना है कि बेटी की यह आधुनिकता उसे बर्दाश्त नहीं है। अगर बेटी उसका कहना माने और प्यार से रहे तो वह आगे का खर्च भी उठाने के लिए तैयार है। करीब दो घंटे तक इस केस पर ही सुनवाई चलती रही। आखिर में केस की जांच व आगे का जिम्मा महिला आयोग ने एसीपी क्राइम अगेंस्ट विमिन पूजा डाबला को सौंप दिया।

बेटी के पिता का कहना है…
18 साल बेटी को शहर के सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ाया। इसके बाद दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलवाया, लेकिन बेटी की आधुनिकता मुझे बर्दाश्त नहीं है। मां-बेटी मुझे खाना बनाकर नहीं देती हैं। 7 महीने से मैं बाहर खाना खा रहा हूं और छोटी बेटी के साथ रहता हूं। बेटी को उसकी मां ने बिगाड़ा है।

मां ने लगाया मारपीट का आरोप
लड़की की मां का कहना है कि पति उनके साथ-साथ बेटी से भी मारपीट करते हैं। शुरू से रवैया ऐसा ही रहा है। इस समय पैसा भी नहीं दे रहे हैं। बेटी के साथ मेरा भी मानसिक रूप से भी उत्पीड़न हो रहा है। लड़की की मां ने कहा कि वह अपने पति से कोई मतलब नहीं रखना चाहती हैं। बेटी ने अपने मन से कुछ लिखकर नहीं दिया। उनका आरोप है कि पति उससे मारपीट कर लिखवाता है।

‘मोबाइल चलाने पर भी होती है दिक्कत’
पिता मेरे अधिकारों का हनन करते हैं। उन्होंने मुझे पढ़ाया उसका कोई भी कर्ज मेरे ऊपर नहीं है, उसके बदले वह मेरा उत्पीड़न कर चुके हैं। आगे मैं पिता का दखल अपनी जिंदगी में नहीं चाहती, लेकिन मेरी आगे की पढ़ाई का खर्च पिता को देना होगा। मेरे मोबाइल चलाने पर भी पिता को दिक्कत होती है और मारपीट करते हैं।

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