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पीएमडी के खेेल से नाराज सीवीओ

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भोपाल

पिछले दिनों भेल के चीफ विजिलेंस आफिसर दो दिवसीय प्रवास पर भोपाल आये, उन्होंंने न केवल कारखाने का अवलोकन किया बल्कि अफसरों की क्लास भी ले डाली। चर्चा है कि सीवीओ साहब कारखाने में चल रहे पीएमडी के खेल से काफी नाराज दिखाई दिये। इसको लेकर उन्होंने अफसरों को फटकार लगाते हुए कह डाला कि भेल के कई विभाग पीएमडी को सालों से रिव्यू नहीं कर रहे है इससे नये वेंडरों को तो काम करने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है। साथ ही भेल को चूना भी लग रहा है। कोडवर्ड के नाम पर आईटीएस विभाग में बड़े घपले होने की संभावना जताते हुए इसे मजबूत करने की सलाह भी दे डाली। उन्होंने एमएम इंजीनियरिंग प्रमुख को भी पीएमडी रिव्यू न होने पर लताड़ लगाई। चर्चा है कि सीवीओ ने भेल के प्रशासनिक भवन के थर्ड फ्लोर पर अफसरों के प्रजेंटेशन के दौरान एक पूर्व ईडी के घपलों का हवाला भी दिया। बनारस में रोलरबेरिंग की खरीदी की बात भी कह डाली। रही बात भेल भोपाल की विजिलेंस की तो पीएमडी के मामले में वह सालों से चुप्पी साध ली है।

दो विभाग के एचओडी बने हैं साहब

भेल कारखाने में कुछ अफसरों की जितनी तारीफ की जाये कम ही है। एक महाप्रबंधक एक अपर महाप्रबंधक पर इस हद तक मेहरबान थे कि उसे दो विभाग का एचओडी बना डाला। दो साल से एचओडी बने यह साहब एचसीएम शॉप और सीडीई इंजीनियंिरंग का काम संभाल रहे। चर्चा है कि कारखाने के नियमानुसार शॉप और इंजीनियरिंग में एक ही अफसर एचओडी नहीं रह सकते, लेकिन सैंय्या भये कोतवाल तो डर काहे का, की तर्ज पर यहां काम चल रहा है। चर्चा यह भी है कि इस साहब से परेशान होकर एक एजीएम ने 53 साल की उम्र में ही रिटायरमेंट ले लिया। लेकिन फिर भी प्रबंधन के सिर पर जूं तक नहीं रेंगी। ऐसा कब तक चलता रहेगा, यह तो र्ईडी साहब ही जाने। इधर 6 साल से प्रमोशन न होने से परेशान स्विचगियर के एसएसएक्स विभाग के एक उप महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी डीडब्ल्यू कोल्हे ने भी 24 अप्रैल को अपने वरिष्ठ अफसरों को खरी खोटी सुनाते हुए अपने पद से स्तीफा दे दिया।

कलारी हटाने श्रेय लेने की होड़

प्रकाश नगर कलारी पर चल रही श्रेय लेने की होड़ पिछले सप्ताह से आरंभ हुआ यह धरना, आंदोलन निरंतर चल रहा है जिसमें आम जनमानस प्रदर्शन कर रहा है लेकिन अब श्रेय लेने की होड़ मच गई है जहां एक और पूर्व महापौर इसमें श्रेय लेने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं वहीं अपने पूरे मंडल के लोगों लगा रखा है। महापौर आलोक शर्मा इस कलारी के लिए वरदान साबित हुए जिन्होंने आते ही घोषणा की कि यह कलारी हट जाएगी परिणाम यह निकला कि यह कलारी की शिफ्टिंग की तैयारी हो रही है। आखिरकार यह जीत उन महिलाओं की है जिन्होंने निरंतर यह आंदोलन चलाया, इस आंदोलन में बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना जैसे संगठनों ने भी आ कर अपनी अपनी ताकत दिखाई। चर्चा है कि छुटभैए नेताओं-नेत्री तो यह मान चुके थे कि यह आंदोलन तो पार्षद पद की सीढ़ी है इस कारण पहले से धरने में आ रहे दो पार्षदों को भी सिर्फ इसलिए दूर कर दिया कि कही ये हिट ना हो जाये पर ये दो पार्षद भी कहां मानने वाले थे वो भी अंदर से लड़ाई लड़ते देखे गए। बरहाल चर्चा में रही वह जो प्रकाश नगर में एक नेत्री की बनी है द्वितीय पक्ष शराब ठेकेदार धरने पर बैठने का प्रलोभन।

अब तो जीएम बना दो साहब

भेल में हर साल प्रमोशन की बहार आती है इन प्रमोशनों में कुछ ऐसे अफसर भी हैं जो जो सीनियर होने और इंटरव्यू देने के बाद भी प्रमोशन नहीं पाते जबकि नियमानुसार इनका प्रमोशन होना चाहिए। ऐसी चर्चाएं भेल के अपर महाप्रबंधक स्तर के अफसरों की जा रही है। एजीएम के प्रमोशन के लिए चार साल में जीएम बनने का मौका मिलता है। लेकिन एक अफसर एमके धर ऐसे भी हैं जो वर्ष 2008 में एजीएम बने लेकिन दस साल बाद भी जीएम नहीं बन पाये। इसी तरह वर्ष 2009 में एजीएम बने एके चतुर्वेदी, जीके श्रीनिवासा, एमके श्रीवास्तव, जी रामाकृष्णन, वर्ष 2010 के अमिताभ दुबे, नीलम भोगल व अन्य, 2011 के असीम धमीजा, वाययू पाटील, एस चन्द्रशेखर व अन्य और वर्ष 2012 के प्रवीश वाष्र्णेय व अन्य आज तक साक्षात्कार देने के बाद भी महाप्रबंधक नहीं बन पाये। कुछ अफसर यह कहने लगे हैं कि अब तो जीएम बना दो साहब। मजेदार बात यह है कि इस साल प्रमोशन में भी इनका नंबर लग पायेगा या नहीं या फिर कुछ रिटायरमेंट के पूर्व जीएम बनेंगे।

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