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बस बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, इतने रुपये तक हो सकता है महंगा!

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नई दिल्ली

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इन दिनों अपने उच्चतम स्तर पर हैं, लेकिन यह मुश्किल आने वाले दिनों में कम होने की बजाय और बढ़ सकती है। इसकी वजह यह है कि कच्चे तेल की कीमतें अगले साल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। बैंक ऑफ अमेरिका कॉर्पोरेशन के मुताबिक वेनेजुएला और ईरान में सप्लाइ में कमी आने के चलते यह समस्या पैदा हो सकती है। फिलहाल इंटरनैशनल मार्केट में क्रूड ऑइल 77 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर चल रहा है। बैंक का कहना है कि 2019 की दूसरी तिमाही तक यह आंकड़ा 90 डॉलर प्रति बैरल तक हो सकता है। इसकी वजह वैश्विक स्तर पर उत्पादन में कमी की स्थिति है।

केडिया कमोडिटी के एमडी अजय केडिया बताते है कि 13 मई से पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम बढ़ना लगभग तय है. हालांकि, कितने बढ़ने इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. लेकिन मौजूदा समय को देखते हुए कंपनियों की लागत का अनुमान लगाए तो तीन रुपये तक दाम बढ़ाने की जरुरत है. लेकिन कंपनियां 1-1.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती है. कंपनियों ने बताया इसे महज संयोग-इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 24 अप्रैल से बदलाव नहीं करना इन्हें स्थिर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया कदम है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक चुनावों के समय यह होना महज संयोग है

बैंक के मुताबिक ओपेक देशों की ओर से उत्पादन को सीमित किया जा सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते भी कीमतों में इजाफा हो सकता है। बैंक के मुताबिक यदि कीमतों में उछाल जारी रहा तो 2014 के बाद यानी करीब 5 साल के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर जाएगी।

क्रूड ऑइल की कीमतें पहले ही तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर एक बार फिर से प्रतिबंध लगाने का फैसला लेना है। इसके चलते ईरान ने पहले से ही सप्लाइ की कमी से जूझ रहे क्रूड मार्केट को झटका देते हुए उत्पादन में कमी करने की चेतावनी दी है। ओपेक देशों के सप्लाइ कट के फैसले और वेनेजुएला में उत्पादन में अचानक कमी के चलते पहले ही कीमतों में तेजी का दौर जारी है।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के कमोडिटीज रिसर्च के हेड फ्रांसिस्को ब्लैंक ने कहा, ‘अगले 18 महीनों पर नजर रहेगी। हमें लगता है कि ग्लोबल सप्लाइ और डिमांड की स्थिति आने वाले दिनों में टाइट होगी।’ यही नहीं कई अन्य बैंकों ने भी क्रूड की कीमतों में इजाफे की आशंका जताई है।

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