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प्रमोशन की जुगाड़ में भेल के अफसर

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भोपाल

अगले माह प्रमोशन और तबादलों की बहार रहेगी। इसको लेकर कुछ अफसर येन केन प्रकारेण प्रमोशन पाने की जुगाड़ में लग गये हैं। यूं तो अपर महाप्रबंधक एम ईसादोर, रूपेश तैलंग, रामभाऊ पाटिल, संजय चन्द्रा, विपुल अग्रवाल, प्रवीश वाष्र्णेय, रिजवान सिद्दीकी, अमिताभ दुबे, एमके श्रीवास्तव, जीके श्रीनिवासा, असीम धमेजा, एस चन्द्रशेखर, अनंत टोप्पो, ब्रजेश अग्रवाल प्रमोशन की कतार मेें खड़े हैं। प्रमोशन पाने वाले इन नामों की चर्चाएं प्रशासनिक स्तर पर की जा रही है। चर्चा है कि ट्रेक् शन मोटर सेल्स के 2013 के एजीएम एचओडी संजय गोयल भी प्रमोशन पाने की दौड़ में दिखाई दे रहे हैं हालांकि यह अफसर मैन्टेनेन्स के हैं लेकिन तीन साल पहले ट्रेक् शन सेल्स में भेज दिये गये। विभाग में कहा जा रहा है कि ट्रेक् शन मोटर में कस्टमर वैसे भी समय पर पैमेन्ट करता है और पहले से ही इसकी स्थिति सही रही है। जब विभाग के पास पैमेन्ट आने लगा तो इसका श्रेय एजीएम साहब को देने लगे, मतलब साफ है। अपर महाप्रबंधक राजीव सरना भी प्रमोशन के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। इधर खबर यह भी है कि इस बार जीएम पद के लिए प्रबल दावेदारी कर रहे एक अपर महाप्रबध्ंाक के खिलाफ एक महिला कर्मी से छेड़छाड़ की शिकायत भी की गई है। इस शिकायत में कितना दम है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।

टीसीबी के साहब का ध्यान अल्कापुरी पर

भेल कारखाने के ट्रांसफार्मर विभाग में पदस्थ एक अफसर की खुरापाती आदत कम होने का नाम नहीं रही है। पहले वह राजनीति में सक्रिय रहे फिर आरएसएस में काम कर नाम कमाया फिर एक समय जनशक्ति पार्टी से गोविन्दपुरा विधान सभा क्षेत्र से टिकिट पाने की जुगाड़ भी लगाई थी लेकिन एक मामले में ऐसे फंसें की अपनी छवि सुधार ही नहीं पाये। भले ही प्रबंधन ने उनका तबादला मुंबई कर दिया हो लेकिन उन्होंने वहां भी कंपनी का नाम रोशन कर वापस भोपाल यूनिट आ गये। वह काफी समय से ट्रांसफार्मर विभाग में काम कर रहे है। आजकल उनकी राजनीति ठंडे बस्ते में है इसलिए उन्होंने वॉटसएप ग्रुप बनाकर अल्कापुरी हाउसिंग सोसायटी मेें दखलअंदाजी शुरू कर दी है। इससे यहां के बुजुर्ग डीजीएम साहब से काफी परेशान बताये जा रहे हैं। वह एकजुट होकर इनके खिलाफ धीरे-धीरे लामबंद हो रहे हैं। वैसे तो यह साहब तो एक मामले में फंसें होने के कारण लंबे समय से प्रमोशन नहीं ले पा रहे हैं। मामला आज भी कोर्ट में चल रहा है। चर्चा है कि इस बार यदि अल्कापुरी के वरिष्ठ अधिकारी लामबंद हो गये तो साहब को लेेने के देने पड़ जायेंगे।

इंटक में गुटबाजी हावी

वैसे तो भेल की नंबर वन प्रतिनिधि यूनियन इंटक में गुटबाजी कोई नई बात नहीं लेकिन इस बार एक गुट ने यूनियन से अलग होकर यूनियन के खिलाफ खुले आम मोर्चा बंदी शुरू कर दी है। यही नहीं इस गुट के लोग यूनियन के खिलाफ इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष से न केवल मिले बल्कि शिकायत करते हुए यूनियन को भंग कर नये चुनाव की मांग तक कर डाली। चर्चा है कि आग में घी डालने का काम उस समय शुरू हुआ जब यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक कार्यक्रम में भोपाल आये। मजेदार बात यह है कि इसी कार्यक्रम में कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल हैं। यूनियन की कार्यकारिणी की बैठक में कांग्रेस का कार्यक्रम राष्ट्रीय अध्यक्ष को रास नहीं आया। उन्होंने बैठक में ही यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की लू उतार दी। उन्होंने यहां तक कह डाला कि इंटक के करोड़ों सदस्य हैं और वह किसी राजनैतिक दल से नहीं चलते। चर्चा है कि उन्होंने इस बैठक में जो नहीं कहना था वह भी कह डाला, यहां तक कि उन्होंने इस मामले में एक जांच कमेटी के गठन की बात भी कह डाली। इसको लेकर इंटक के विरोध में उतरा एक ग्रुप काफी खुश नजर आया और उसने इस बात का वॉटसएप पर काफी प्रचार प्रसार भी किया।यूं तो यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ने इन बातों से कोई खासा असर दिखाई नहीं दिया। वह हमेशा भगवान श्री कृष्ण का नाम लेकर यूनियन को आगे बढ़ाते रहे हैं।

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