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प्रमोशन के लिए बस थोड़ा इंतजार

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भोपाल

भेल में लंबे समय बाद अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक पद की प्रमोशन लिस्ट में देरी होना सभी के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। हैदराबाद, हरिद्वार और पावर सेक्टर में साक्षात्कार होने के बाद यह उम्मीद जागी थी कि आज कल में ही प्रमोशन लिस्ट जारी होने वाली है। पिछले दो शनिवार से इस पद के दावेदार अपने चहेतों को दिल्ली फोन लगाकर लिस्ट जारी होने का पूछते नजर आये। उन्हें डर सता रहा है कि कहीं कोई बड़े पावर के चलते उनका पत्ता कट न हो जाये। इस चिंता का कोई अंत तो नहीं है हां यह जरूर अटकलें लगना शुरू हो गई है कि प्रमोशन के लिए बस थोड़ा इंतजार करें। चर्चा है कि बोर्ड आफ डायरेक्टर ने लगभग प्रमोशन के दावेदारों की लिस्ट तैयार कर ली है। इसी माह के अंत तक कार्पोरेट प्रबंधन इस लिस्ट पर मुहर लगा देगा।

भोपाल यूनिट में सिर्फ 5 से 6 ही अपर महाप्रबध्ंाक से महाप्रबंधक बन सकते हैं। यूं तो दावेदारों की सूची लंबी है। लेकिन कार्पोरेट स्तर पर अपर महाप्रबंधक पीके मिश्रा, बीके सिंह, विपिन मनोचा, विनय निगम,नीलम भोगल, एम ईसादोर, एस रामनाथन, एमके श्रीवास्तव, अमिताभ दुबे, ब्रजेश अग्रवाल, जीके श्रीनिवासा, एके चतुर्वेदी के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। चर्चा है कि फस्र्ट टाईम साक्षात्कार में भाग लेने वाले अपर महाप्रबंधक संजय चन्द्रा भी कोई बड़े पावर के सहारे महाप्रबंधक बनने की तैयारी में लगे है यानी असंभव को संभव करना। अब देखना यह है कि किसका तीर निशाने पर लगता है।

भेल क्षेत्र में भूमि पूजनों की होड़

गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से टिकट की दावेदारी करने वालों में भूमि पूजन की होड़ लगी है। जहां महापौर समर्थक पार्षद महापौर की निधि से भूमि पूजन कराने में पीछे दिखाई नहीं दे रहे है तो विधायक निधि से भूमि पूजन कराने का रिकॉर्ड पूर्व महापौर तोडऩे में आगे दिखाई दे रही है। इन भूमि पूजनों में विधायक कम पूर्व महापौर ज्यादा दिखाई दे रही है इसको लेकर जहां भाजपा दो खेमों में बटीं हुई है तो मप्र पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष भीतर ही भीतर ही अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हंै। चर्चा है कि वह जल्द ही इस विधान सभा क्षेत्र में कोई नया बड़ा धमाका करने वाले है। इस विधान सभा क्षेत्र में विधायक व पूर्व महापौर ने चारों मंडल अध्यक्ष अपने बनाकर अपना झंडा गाड़ दिया तो दूसरी और बूथ अध्यक्षों की बैठक में महापौर समथकों को दरकिनार करना चर्चा का विषय बना हुआ है। वार्ड 64 के पार्षद व एमआईसी मेंबर तो संगठन की बैठकों में न बुलाने से काफी नाराज चल रहे है। इस विधान सभा क्षेत्र में दो खेमों में बटीं भाजपा का भगवान ही मालिक है।

ट्रांसफार्मर विभाग को लेकर चर्चाएं

भेल कारखाने में सबसे ज्यादा ऑर्डर हासिल करने वाले ट्रांसफार्मर विभाग आजकल चर्चाओं में है। इस विभाग से निकले अधिकारी आरके तिवारी, सर्वश चतुर्वेदी, डीके ठाकुर और एस बालाकृष्णन जीएमआई और ईडी तक बन गये। विभाग का परफार्मेंस कंपनी के लिए बेहतर रहा। इस बार एक कामर्शियल मेंं काम करने वाले अधिकारी को विभाग की कमान सौंपने के बाद व भरपूर ऑर्डर होने के बाद भी यहां टर्न ओवर से पीछे दिखार्द दे रहा है तो वहीं एनटीपीसी का एक करोड़ों का ट्रांसफार्मर के टेस्ट में फेल होने की चर्चाएं भी गर्म हो गई। इसका खामियाजा आखिर कंपनी को ही भुगतना पड़ रहा है। भेल को तो नुकसान पहुंचा ही है साथ ही उसकी साख पर भी बुरा असर पड़ा है इसको लेकर भेल के चेयरमेन को भी इस यूनिट का दौरा करना पड़ा। चर्चा है कि विभाग के मुखिया पर गाज गिर सकती है। उनको दिल्ली भेजे जाने की अटकलों पर विराम नहीं लग रहा है। कार्पोरेट प्रबंधन उनका उपयोग कामर्शियल का जानकार होने के कारण दिल्ली में कर सकती है। कंपनी ने उनकी जगह विभाग में एक बेहतर मुखिया की तलाश शुरू कर दी है।

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