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प्रमोशन चाहिए तो बाहर जाइए

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भोपाल 

वित्तीय वर्ष समाप्त होते ही प्रशासनिक फेरबदल की अटकलें लगना शुरू हो गई है। महाप्रबंधकों की कमी से जूझ रही भोपाल यूनिट में भी भेल के मुखिया बड़े स्तर पर फेरबदल सकते हैं। मजेदार बात यह है कि पूरी नौकरी भोपाल यूनिट में गुजार देने वाले महाप्रबंधक स्तर के अफसरों को भी अब बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी शुरू हो गई है। चर्चा है कि कार्पोरेट स्तर पर अगले साल तक कई ईडी के रिटायरमेंट के चलते नये अफसरों को प्रमोशन चाहिए तो बाहर जाइए की तर्ज पर अन्य यूनिटों में भेज सकता है।

भोपाल कॉडर के हैदराबाद के ईडी का चयन डायरेक्टर के लिए पहले ही हो चुका है। चर्चा है कि भोपाल के महाप्रबंधक राजीव सिंह, टीके बागची और डीडी पाठक को बाहर भेजा जा सकता है। झांसी के ईडी डीके दीक्षित, दिल्ली के सर्वेश चतुर्वेदी और भोपाल के ईडी डीके ठाकुर भी अगले साल भेल को अलविदा कहेंगे। वहीं हैदराबाद के ईडी का पद भी रिक्त हो जायेगा। चर्चा है कि इसी साल डायरेक्टर पॉवर अखिल जोशी भी रिटायर हो जायेंगे, उनकी जगह हरिद्वार के ईडी संजय गुलाटी के नाम की चर्चाएं की जा रही है। ऐसे में भोपाल यूनिट से किसी जीएम को हरिद्वार भेजा जा सकता है। भोपाल कॉडर के बंगलूरू में पदस्थ एक ईडी को भी डायरेक्टर बनाये जाने की चर्चाएं जोरों पर है। यूं तो कुछ अफसरों की निगाहें आज भी भोपाल यूनिट पर लगी हुई है।

सबका साथ सबका विकास

भेल भोपाल यूनिट में रहकर ई-1 से ई-8 तक की नौकरी पूरी करने वाले भेल के मुखिया सबका साथ सबका विकास की राह पर चल पड़ें हैं। हैदराबाद से भोपाल यूनिट की कमान संभालने के बाद सिर्फ टारगेट-टारगेट की रट लगाये काम में तो जुटें है लेकिन मानव संसाधन की दम पर प्रशासनिक पकड़ से थोड़ा दूर हो गये है। इसके चलते कुछ नेता उनके बारें में तरह-तरह की चर्चा करते नजर आते हैं। चर्चा है कि इस बार भेल के मुखिया ने ठान ली है कि यदि सबका साथ सबका विकास लोगों को रास नहीं आ रहा है। तो प्रशासनिक कसावट लाने डंडा चलाना ही पड़ेगा। यह पहला मौका है कि जीएम एचआर का दरबार खाली-खाली नजर आता है। काम छोटा हो या बड़ा लोग आज भी अपने काम के लिए ईडी दरबार में दस्तक देते नजर आते हैं। अब देखना है कि वित्तीय वर्ष समाप्ति के बाद ईडी साहब क्या कड़े कदम उठाते है?

जवाहर में एक नाम के दो छात्र

भेल के जवाहर स्कूल का मामला अजीबो-गरीब है। कौन फैल है और कौन पास है? इसको लेकर स्कूल प्रबंधन तो खुद तो परेशान है और अभिभावक भी आमने सामने है। मजेदार बात यह है कि दोनों छात्र क्लास 1 से लेकर क्लास 9 तक इसी स्कूल में पढ़ रहे हैं। दोनों छात्र का नाम तो एक है ही साथ ही पिता का नाम भी एक जैसा है। इसको लेकर स्कूल प्रबंधन दोनों छात्रों के रिजल्ट ही रोक दिये। अब यह समझ में नहीं आ रहा है इनमें से पास कौन है और फैल कौन है? चर्चा है कि स्कूल प्रबंधन दोनों पक्षों के अभिभावकों के सामने सोमवार को फिर से कॉपी निकलवाकर हेंड राइटिंग का मिलान कर फैसला करेगा।

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