Home राजनीति प्रमोशन में आरक्षण, केंद्र ने शुरू की कवायद

प्रमोशन में आरक्षण, केंद्र ने शुरू की कवायद

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नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच के अंतरिम आदेश के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। बेंच ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा था कि जब तक संवैधानिक पीठ इस पर कोई फैसला नहीं देती, तब तक वर्तमान कानूनों का पालन होना चाहिए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने बुधवार को हमारे सहयोगी इकॉनमिक टाइम्स से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार के इस दृष्टिकोण की पुष्टि करता है कि प्रामोशन में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इस बात को लेकर स्पष्ट थी कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में कोई भी ‘क्रीमी लेयर’ नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के बाद, मैंने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के साथ कानून मंत्रालय से इस मामले पर चर्चा की। हमने तय किया कि खाली पड़ी जगहों भरने के लिए कदम उठाए जाएं।’ उन्होंने यह भी कहा कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग अब इस मामले का अध्यन्न करेगा और 3-4 सर्कुलर जारी करेगा।

2006 में नागराज जजमेंट में कहा गया था कि यह जरूरी नहीं है कि राज्य पदोन्नति में एससी/एसटी के लिए आरक्षण दें और वह ऐसा करना चाहते हैं तो इससे पहले समुदायों की पिछड़ेपन और सार्वजनिक रोजगार में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व दिखाने के लिए मात्रात्मक डेटा एकत्र करना चाहिए। इस फैसले को चुनौती मिली थी, जिसके बाद इसे संवैधानिक पीठ को भेज दिया गया था, जहां अब तक इसकी सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट की वैकेशन बेंच ने अंतिम फैसले तक पदोन्नति में आरक्षण की अनुमति दे दी है।

केंद्रीय मंत्री गहलोत ने कहा कि एससी/एसटी में क्रीमी लेयर नहीं है। दशकों तक उनके साथ हुए भेदभाव और छुआछूत जैसे अत्याचारों की पृष्ठभूमि पर उन्हें आरक्षण दिया गया है। अनुसूचित जनजाति सबसे पिछड़े इलाकों में रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि पदोन्नति में आरक्षण सिर्फ इस आधार पर किया जाता है कि उनका सही प्रतिनिधित्व हो।

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