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फिल्म की आलोचना हुई तो अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर ने दी सफाई

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘102 नॉट आउट’ में अपने किरदार के गुजराती उच्चारण को लेकर हुई आलोचना पर सफाई देते हुए कहा कि इस फिल्म को पूरे देश के दर्शकों के लिए बनाया गया है। इसलिए गुजराती उच्चारण पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। 2016 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘तीन’ के बाद से बिग बी ने एक नियम बनाया है कि वह अपनी हर फिल्म की रिलीज़ के एक या दो हफ्ते बाद मीडिया से जरूर बात करेंगे और इसी नियम का पालन करते हुए अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर ने फिल्म ‘102 नॉट आउट’ की सफलता का जश्न मनाते हुए मीडिया से भी बात की।

मेरी और चिंटू (ऋषि कपूर) की आलोचना की गई है
गुजराती उच्चारण को लेकर हुई आलोचना पर अमिताभ कहते हैं, ‘हमारी फिल्म 102 नॉट आउट को लेकर मेरी और चिंटू (ऋषि कपूर) की मीडिया ने एक जैसी आलोचना की गई है कि फिल्म में हमारा गुजराती लहजा सही नहीं था। फिल्म में यदि किसी की भाषा सबसे सही थी तो वह गुजराती फिल्मों के कलाकार जिमिति की थी।’ अमिताभ बच्चन की इस बात पर हंसते हुए ऋषि कपूर ने जिमित से कहा, ‘तू कभी पंजाबी फिल्म में काम करके देख।’

तो फिर आप हमारे ऊपर क्यों चढ़ गए हैं
अमिताभ बच्चन ने भाषा के लहजे को लेकर हुई आलोचना पर सफाई देते हुए कहा, ‘देवियों और सज्जनों आपके साथ कई गुजराती सज्जन भी होंगे। जब वह हिंदी या अंग्रेजी में बात करते हैं तो क्या आप समझ जाते हैं कि उनका टोन गुजराती है। नहीं समझते न… तो फिर आप हमारे ऊपर क्यों चढ़ गए हैं। फिल्म में कई जगह पर हमने यह दिखाने की कोशिश जरूर की है कि हमारा किरदार गुजराती है। कुछ अंग्रेजी के शब्द जैसे रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी को भी हमने गुजराती टोन में कहा है। मेरा मानना है कि हमारी फिल्में पैन पैन इंडिया हैं और फिल्म सबको समझ आनी चाहिए। अगर हम किरदारों को गुजराती बताने के लिए जोरदार उच्चारण डाल देंगे तो शायद अलग प्रांतो के दर्शकों को फिल्म ठीक से समझ में नहीं आएगी। बस इसलिए हमने जानबूझ कर गुजराती उच्चारण कम रखा है। हमारी फिल्म के निर्देशक उमेश का आदेश भी यही था कि फिल्म को ज्यादा गुजराती हास्य चित्र नहीं बनाना है।’

फिल्म में ज्यादा ग्लैमर जोड़ दिया होता तो फिल्म खराब हो जाती
अमिताभ कहते हैं, ‘कुछ लोगों ने मुझसे यह भी कहा कि ज्यादातर फिल्म एक कमरे या घर के अंदर शूट हुई है। आज के समय में जहां किसी फिल्म को बेहद ही भव्य रूप में बनाया जाता है, ऐसे में लगता नहीं कि आपको आउटडोर सीन ज्यादा रखने चाहिए थे। मेरे पास उनके इस बात के लिए कोई तर्क नहीं था। फिल्म के निर्देशक उमेश उस लोकेशन को चाहते थे, ताकि वह एक मिडिल क्लास वालों का घर लगे। हम घर में इसलिए ज्यादातर शूट कर रहे थे क्योंकि बाप-बेटे की अधिकतर बातचीत उस घर के अंदर घर को लेकर ही थी। अगर इस फिल्म में हमने ज्यादा ग्लैमर जोड़ दिया होता तो फिल्म की कहानी खराब हो जाती। कहानी में पिता-पुत्र के बीच ज्यादातर उनके पर्सनल रिश्तों की बातचीत और इमोशन है, जो उस घर के अंदर ही हो सकते थे।’

मुझे यह आलोचना बेकार लगती है
बातचीत के दौरान ऋषि कपूर ने कहा, ‘मुझे भी एक आलोचना सुनने को यह मिली कि फिल्म एक थिअटर में हो रहे ड्रामे की तरह लगती है। उन आलोचकों को मैं यही कहूंगा कि आपको ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि आप जानते हैं कि यह एक प्ले है, जो लगातार कई सालों से थिअटर में दिखाया जा रहा है। मेरे पिता राजकपूर ने एक फिल्म संगम बनाई थी, उस पूरी फिल्म में सिर्फ 3 ही किरदार थे, फिल्म 4 घंटे की थी, लेकिन किसी ने नहीं कहा कि यह प्ले है। इसलिए मुझे यह आलोचना बेकार की लगती है।’

‘102 नॉट आउट’ का निर्देशन उमेश शुक्ला ने किया है। फिल्म में अमिताभ के साथ ऋषि कपूर मुख्य भूमिका में हैं। दोनों कलाकार 27 साल बाद किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे। फिल्म को संगीत से सजाया है सलीम सुलेमान ने। यह बूढ़े हो चुके बाप-बेटे के बीच की कहानी है, जो साथ-साथ हंसते-रोते अपनी जिंदगी का लुत्फ उठा रहे हैं।

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