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बढ़ेगी गर्मी तो पानी के लिए तरसेगी दिल्ली

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नई दिल्ली

दिल्ली को करीब 1100 एमजीडी की जरूरत है, लेकिन पानी की कमी की वजह से सप्लाई महज 890 एमजीडी ही हो रही है। इसमें से भी 35 से 40 पर्सेंट पानी पुरानी पाइपलाइन में लीकेज और चोरी की वजह से बर्बाद हो रहा है। जल बोर्ड के अनुसार, सर्दियों में भी पानी की किल्लत थी, लेकिन डिमांड कम होने की वजह से काम चल गया। गर्मियों के शुरू होते ही हालात विकट हो रहे हैं। तापमान 37 से 40 डिग्री पार करने के बाद भी यदि यही स्थिति बनी रही तो काम कैसे चलेगा यह बड़ी समस्या बन सकता है।

पानी किल्लत से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में साउथ-वेस्ट, नॉर्थ फ्लड प्लेन और नॉर्थ-वेस्ट एरिया हैं। वजीराबाद, अशोक विहार, करोल बाग, डिफेंस कॉलोनी, अमर कॉलोनी में हफ्ते में एक या तीन दिन ही पानी की सप्लाई पहुंच रही है। तापमान इस समय 32 डिग्री सेल्सियस चल रहा है और डिमांड करीब 1100 एमजीडी तक बढ़ गई है। यह डिमांड अगले महीने के मध्य से 1300 से 1400 एमजीडी तक पहुंच सकती है।

जल बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार, डिमांड और सप्लाइ में इस समय करीब 210 एमजीडी का अंतर है। इसकी वजह यह है कि न यमुना से पानी मिल पा रहा है और न वजीराबाद पॉन्ड से। इसके अलावा मुनक नहर में भी प्रदूषित पानी आ रहा है। इसकी वजह से सभी वॉटर ट्रीटमेंट कम क्षमता पर काम कर रहे हैं।

एक्सपर्ट मानते हैं कि दिल्ली में यह समस्या नई नहीं है। दिल्ली में पानी सप्लाई की व्यवस्था साल 1930 में विकसित की गई थी और अब तक वही चल रही है। दिल्ली जल बोर्ड भी यह स्वीकारता है कि जितना पानी सप्लाइ किया जा रहा है उसका करीब 40 पर्सेंट पानी घरों तक नहीं पहुंचता। इसकी वजह पाइपलाइन में लीकेज और पानी की चोरी है। सालों से यह 40 पर्सेंट है और इसे कम करने के लिए कोई काम अभी तक नहीं हुआ है। हालांकि, मौजूदा समय में जल बोर्ड फ्लो मीटर लगाकर पानी की बर्बादी रोकने का दावा कर रहा है, जिसे डिवेलप करने में करीब 8 महीने से एक साल का समय लगने की बात कही जा
रही है।

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